
कच्चे माल की कीमतों में 30% उछाल, भारत में दवाओं के दाम तेज़ी से बढ़ने की आशंका
The Wire
ईरान संघर्ष के बीच कंटेनर जहाजों की कमी के कारण कच्चे माल की कीमतों में करीब 30% की बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते भारत में दवाओं के दाम तेज़ी से बढ़ने की आशंका है. उद्योग से जुड़े लोगों ने कहा कि जहाजों की कमी के कारण चीन से आने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) की आपूर्ति प्रभावित हुई है. चीन भारतीय दवा निर्माताओं के लिए कच्चे माल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है.
नई दिल्ली: ईरान संघर्ष के बीच कंटेनर जहाजों की कमी के कारण कच्चे माल की कीमतों में करीब 30% की बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते भारत में दवाओं के दाम तेज़ी से बढ़ने की आशंका है. यह जानकारी द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में दी गई है.
उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, जहाजों की कमी के कारण चीन से आने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) की आपूर्ति प्रभावित हुई है. चीन भारतीय दवा निर्माताओं के लिए कच्चे माल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है. इस बाधा का असर स्थानीय उत्पादन पर पड़ सकता है और कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने के लिए मजबूर हो सकती हैं.
इकोनॉमिक टाइम्स के हवाले से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कुछ प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में 60% से अधिक तक वृद्धि हुई है. दिसंबर के बाद से ग्लिसरीन की कीमत 64% बढ़ गई है, जबकि पैरासिटामोल की कीमत में 26% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
उद्योग के एक अधिकारी ने बताया कि कच्चे माल की कीमतों में तेज़ उछाल के कारण आयात करने वाले यह अतिरिक्त बोझ सीधे बड़ी दवा कंपनियों पर डाल रहे हैं.
अख़बार के अनुसार, अधिकारी ने कहा, ‘एपीआई की कीमतें बढ़ने सॉल्वेंट्स की कीमतों में 20% से 30% तक उछाल और शिपिंग कंपनियों द्वारा अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने के कारण आयातकों के पास इस लागत को खुद वहन करने की कोई गुंजाइश नहीं है.’
दिसंबर से मार्च के बीच कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाजार आंकड़ों के अनुसार, नीमोसुलाइड की कीमत 53% बढ़कर 425 रुपये से 650 रुपये हो गई है. नॉरफ्लॉक्सासिन की कीमत 14% बढ़कर 2,375 रुपये से 2,700 रुपये हो गई, जबकि ऑर्निडाजोल की कीमत 25% बढ़कर 960 रुपये से 1,200 रुपये तक पहुंच गई. वहीं क्लोबेराजोल प्रोपियोनेट की कीमत 47% बढ़कर 39,500 रुपये से 58,000 रुपये हो गई है.

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ईरान संघर्ष के बीच कंटेनर जहाजों की कमी के कारण कच्चे माल की कीमतों में करीब 30% की बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते भारत में दवाओं के दाम तेज़ी से बढ़ने की आशंका है. उद्योग से जुड़े लोगों ने कहा कि जहाजों की कमी के कारण चीन से आने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) की आपूर्ति प्रभावित हुई है. चीन भारतीय दवा निर्माताओं के लिए कच्चे माल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है.

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