
दिल्ली: लापता छात्रों-कार्यकर्ताओं की हिरासत पर हाईकोर्ट में सुनवाई, पुलिस बोली- सबको छोड़ दिया गया
The Wire
दिल्ली हाईकोर्ट ने तीन हीबियस कॉर्पस याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अधिकारियों द्वारा दस छात्रों और कार्यकर्ताओं की कथित अवैध हिरासत के मामले में दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा. इस दौरान पुलिस ने अदालत से कहा कि सभी लोगों को रिहा कर दिया गया है.
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने रविवार (15 मार्च) को राष्ट्रीय राजधानी में स्पेशल सेल के अधिकारियों द्वारा दस छात्रों और कार्यकर्ताओं की कथित अवैध हिरासत के मामले में दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा. इस दौरान पुलिस ने अदालत को बताया कि सभी लोगों को रिहा कर दिया गया है.
यह मामला तब सामने आया जब कैंपेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन (सीएएसआर) ने एक प्रेस नोट जारी कर आरोप लगाया कि सादे कपड़ों में आए अधिकारियों ने दो मज़दूर अधिकार कार्यकर्ताओं, दो विस्थापन-विरोधी कार्यकर्ताओं और छह छात्रों सहित कई लोगों को उठा लिया है और वे सभी लापता हैं. उनमें से किसी ने भी अपने मित्रों, परिवार या सहकर्मियों से संपर्क नहीं किया है.
इस कथित अवैध हिरासत को लेकर दायर तीन हैबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की पीठ ने दिल्ली पुलिस से उन परिस्थितियों के बारे में बताने को कहा जिनके तहत उन्हें हिरासत में लिया गया था.
सीएएसआर ने इन लोगों के ठिकाने की तत्काल जानकारी, उनकी शारीरिक सुरक्षा की गारंटी, वकील तक पहुंच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जवाबदेही तय करने की मांग की थी.
एक याचिका में लक्षिता राजोरा को अदालत में पेश करने की मांग की गई थी.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, हैबियस कॉर्पस की एक याचिका अधिवक्ता दीक्षा द्विवेदी ने सागरिका राजोरा की ओर से दायर की थी. इसमें उनकी बहन लक्षिता राजोरा को तुरंत अदालत के सामने पेश करने का निर्देश देने की मांग की गई.

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