
भड़कते शोले, जलती लाशें, बदहवास लोग...हरदा हादसे के चश्मदीदों ने सुनाई दर्दनाक मंजर की खौफनाक दास्तान
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Harda Blast: मध्य प्रदेश के हरदा शहर की मंगलवार सुबह शायद अब तक की सबसे बुरी और चीख पुकार से भरी थी. दोपहर की तरफ जाता सूरज 11 बजे करीब अचानक जबरदस्त धमाके की आवाज से ठिठक गया. इन आवाजों के साथ लोगों के घरों के शीशे, टिन, दरवाजे, बर्तन सब हवा में उड़ने लगे थे. इस हादसे के चश्मदीदों ने सुनाई दर्दनाक मंजर की खौफनाक दास्तान.
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 150 किलोमीटर दूर हरदा शहर बसा है. करीब 7 लाख की आबादी वाले इस शहर की मंगलवार की सुबह शायद अब तक की सबसे बुरी और चीख पुकार से भरी सुबह थी. दोपहर की तरफ जाता सूरज 11 बजे करीब अचानक जबरदस्त धमाके की आवाज से ठिठक गया. धमाके की गूंज इतनी ताकतवर थी कि 10 किलोमीटर दूर तक उसकी आवाजें सुनाई दे रही थी.
इन आवाजों के साथ लोगों के घरों के शीशे, टिन, दरवाजे, बर्तन सब हवा में उड़ने लगे थे. कुछ पल के लिए तो शुरु में ऐसा लगा जैसे कोई बम ब्लास्ट हुआ हो. लेकिन फिर जब इस इलाके से इस तरह शोले उठने लगे तो यहां हरेक को अंदाजा हो गया कि किसी चिंगारी ने बारूद की फैक्ट्री यानि पटाखे के कारखाने में जाकर दस्तक दे दी. जिस वक्त धमाका हुआ उस वक्त फैक्ट्री के भीतर और बाहर कई लोग मौजूद थे.
कुछ लोगों को तो वही धमाका हवा में उड़ा कर दूर खेतों और सड़कों तक ले गया. दूर-दूर तक लोगों की लाशे बिखरी पड़ी थी. उस वक्त घायलों की तो सुध लेने वाला भी कोई नहीं था. ऐसे में गिनती नामुमकिन थी. एक बार धमाके और गुबार में लिपटी लपटों के आसमान तक उठने का जो सिलसिला शुरू हुआ तो अगले कई मिनटों तक ऐसा ही चलता रहा. रुक-रुक कर धमाके होते रहे. लोग बदहवास जान बचाने के लिए भागते रहे.
आसमान के रास्ते उड़ रहे थे फैक्ट्री से निकले शोले-चिंगारी
पटाखे की इस फैक्ट्री में काम करने वाले बहुत से लोग आस-पास ही रह रहे हैं. फैक्ट्री के साथ-साथ कई घरों में भी बारूद रखे हुए थे. फैक्ट्री से निकले शोले और चिंगारियां आसमान के रास्ते उड़-उड़ कर उन घरों तक पहुंच रही थी. जहां पहले से ही बारूद रखे हुए थे. देखते ही देखते फैक्ट्री के आस-पास के करीब 60 घर भी इसकी चपेट में आ गए. थोड़ी ही देर में उन घरों से धमाकों की आवाजें आने लगीं जहां बारूद रखे थे.
किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि इस हाल में वो क्या करे. फैक्ट्री के साथ-साथ एक-एक कर लगातार घर जल रहे थे. इस पूरे रास्ते में बहुत सारे लोग तब मौजूद थे. कुछ लोग उन फंसे लोगों को बचाना भी चाहते थे. लेकिन समझ नहीं आ रहा था कि आग के शोलों में कूदे कैसे? हरदा जैसी छोटी जगह पर इतने बड़े हादसे से निपटने या मदद पहुंचाने के उतने इंतजाम भी नहीं थे. कुल मिलाकर हालात बहुत भयावह थे.

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