
बेरहमी से कत्ल, टुकड़ों में लाश और सबसे बड़ी चोरी... ये थे साल 2023 के दहला देने वाले टॉप 10 क्राइम
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जुर्म के हिसाब से भी जुर्म के अनगिनत जख्मों के लिए साल 2023 को भुलाया नहीं जा सकता. तो चलिए एक बार फिर बीते साल 2023 के उन 10 बड़े जख्मों को कुरेदते हैं या यूं कहें कि बड़े अपराधों पर नजर डालते हैं, जो साल 2023 ने देश को दिखाए.
Crime in 2023: 365 दिन.. एक साल की पूरी उम्र यही होती है. 365 दिन. साल 2023 की उम्र भी यही 365 दिन थी. बीते 2022 सालों की तरह अब 2023 को भी कैलेंडर के पलटे हुए पन्नो में छुप गया है. यानि 2023 को अब हम अलविदा कह चुके हैं. लेकिन हर कोई अपनी अपनी जिंदगी के हिसाब से इन बीते 365 दिनों को यानि साल 2023 को अच्छी बुरी यादों के साथ याद रखेगा या फिर भूलने की कोशिश करेगा.
जुर्म के हिसाब से भी जुर्म के अनगिनत जख्मों के लिए साल 2023 को भुलाया नहीं जा सकता. तो चलिए एक बार फिर बीते साल 2023 के उन 10 बड़े जख्मों को कुरेदते हैं या यूं कहें कि बड़े अपराधों पर नजर डालते हैं, जो साल 2023 ने देश को दिखाए. ये थे 2023 के टॉप 10 क्राइम-
पथरीली मौत - अंजलि केस तमाम पुराने जख्मों और कड़वी यादों को भुला कर ठीक साल भर पहले 2022 की उस आखिरी रात में भी हर किसी ने एक नई उम्मीद के साथ 2023 का स्वागत किया था. पर कमबख्त साल के पहले दिन ने ही देश की राजधानी दिल्ली की पथरीली सड़कों पर जिस तरह इंसानियत को दम तोड़ते देखा. उसने नए साल की पहली तारीख को ही खूनी बना दिया था. नए साल की पहली सर्द रात ही एक मोटरकार के पहियों के नीचे एक लड़की पूरे 12 किलोमीटर तक दिल्ली की पथरीली सड़कों पर तब तक घिसटती रही जब तक के उसके जिस्म की हड्डिया नजर नहीं आने लगी.
2023 की पहली और नई सुबह ही अंजली की दर्दनाक मौत की कहानी के साथ शुरु हुई थी. दिल्ली के कुछ नौजवान तब 22 को अलविदा कहने और 23 का स्वागत करने के लिए नशे में चूर थे. इतने चूर कि उनकी मोटरकार के पहिए के नीचे अंजलि आधे घंटे से ज्यादा फंसकर घिसटती रही और उन्हें कार की बहकती चाल तक का अंदाजा नहीं हुआ और जब अंदाजा हुआ तो पहियों में उलझी अंजलि को बाहर निकालने के बजाय. कार की रफ्तार बढ़ा दी.
इस एक केस ने तब दिल्ली के कानूनी हलकों में ये बहस छेड़ दी थी कि अंजलि के कातिलों को लापरवाही से हुई मौत यानि सड़क हादसे से जुड़ी धाराओं के तहत सजा दी जाए. या फिर सीधे-सीधे धारा 302 यानि कत्ल का मुकदमा चलाया जाए. पुलिस ने लोगों के गुस्से को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ धारा 302 ही लगाई. लेकिन अब पूरा साल खत्म हो गया. पर मुकदमा अभी जारी है. ना जाने इस मुकदमें के फैसले और अंजलि के कातिलों को सजा देने या दिलाने के लिए और कितने नए सालों का इंतजार करना होगा.
निक्की यादव मर्डर केस हर गुजरता साल आने वाले नए साल को विरासत में कुछ ना कुछ सौंप कर जाता है. 2022 आफताब और श्रद्धा की फ्रिज वाली कहानी का गवाह बना था. 2023 ने भी इसी विरासत को आगे बढ़ाया. श्रद्धा की तरह ही इसी दिल्ली में निक्की यादव नाम की एक लड़की फ्रिज में बंद पड़ी थी. निक्की का कातिल साहिल आफताब और श्रद्धा की कहानी सुन चुका था. फ्रिज के नए इस्तेमाल का तरीका भी अब वो सीख चुका था. आफताब और श्रद्धा की तरह ही निक्की और साहिल भी लिव-इन में रह रहे थे. पर शादी और कुछ मसलों को लेकर दोनों में झगड़ा हुआ. श्रद्धा की तरह निक्की भी मारी गई. और फिर वैसे ही साहिल के ढाबे के फ्रिज में बंद हो गई.

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