
बिहार की सियासत में हाशिए पर कन्हैया! बेगूसराय के बहाने आखिर क्या हो गया खेला?
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Kanhaiya Kumar News: बिहार में INDIA ब्लॉक के दलों के बीच सीट बंटवारे का आधिकारिक ऐलान होते ही तमाम कयासों और दावों पर विराम लग चुका है. पप्पू यादव कसम खाए बैठे हैं कि वह पूर्णिया से ही चुनाव लड़ेंगे, लेकिन सबसे बड़ा सवाल कन्हैया कुमार के राजनीतिक भविष्य पर है.
लंबे इंतजार के बाद आखिरकार शुक्रवार को बिहार के लिए महागठबंधन के दलों में सीट बंटवारे का आधिकारिक ऐलान हो गया. काफी जद्दोजहद के बाद कांग्रेस ने आरजेडी से गठबंधन में 9 लोकसभा सीटें हासिल कर लीं, लेकिन उसके दावे वाली ज्यादातर सीटों को आरजेडी ने या तो अपने पाले में रख लिया या फिर उसे लेफ्ट के खेमे में दे दिया.
महागठबंधन में सीट बंटवारे के ऐलान के बाद सबसे ज्यादा चर्चा हाल ही में अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने वाले पप्पू यादव और सीपीआई छोड़कर कांग्रेस का हाथ पकड़ने वाले कन्हैया कुमार की हो रही है. दरअसल पप्पू यादव और कन्हैया कुमार बिहार में अलग-अलग लोकसभा सीटों से कांग्रेस के दावेदार माने जा रहे थे. लेकिन सीट शेयरिंग में लालू ने कुछ ऐसी कैंची चलाई की पप्पू और कन्हैया दोनों किनारे लग गए.
मुकाबले से बाहर कन्हैया
कांग्रेस ने सीट बंटवारे में बेगूसराय सीट कन्हैया कुमार के लिए मांगी थी, जबकि पूर्णिया लोकसभा सीट पर पप्पू यादव अंतिम दौर तक दावा करते रहे. लेकिन राजद ने इन दोनों सीटों पर कांग्रेस की दाल नहीं गलने दी. बेगूसराय सीट आरजेडी ने सहयोगी लेफ्ट को दे डाली तो वहीं पूर्णिया सीट अपनी पार्टी की उम्मीदवार बीमा भारती के लिए रख ली.
सीट बंटवारे का आधिकारिक ऐलान होते ही तमाम कयासों और दावों पर विराम लग चुका है. पप्पू यादव कसम खाए बैठे हैं कि वह पूर्णिया से ही चुनाव लड़ेंगे लेकिन सबसे बड़ा सवाल कन्हैया कुमार के राजनीतिक भविष्य पर है. कन्हैया 2019 के लोकसभा चुनाव में बेगूसराय से मैदान में उतरे थे, उनका मुकाबला बीजेपी के दिग्गज नेता गिरिराज सिंह से था. कन्हैया कुमार और गिरिराज सिंह के मुकाबले की खूब चर्चा हुई थी.
2019 के चुनाव में बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से सबसे हाई प्रोफाइल सीट बेगूसराय रही. लेकिन कन्हैया को जीत हासिल नहीं हुई. गिरिराज सिंह ने उन्हें बड़े अंतर से हराया था. पिछले चुनाव में कन्हैया बेगूसराय से सीपीआई के उम्मीदवार थे. जेएनयू से राजनीति में सक्रिय होने वाले कन्हैया की पहचान एक वाकपटु युवा लेफ्ट नेता की थी.

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