
बागियों से निपटने के लिए क्या है शिरोमणि अकाली दल की प्लानिंग? जानें पहले कब-कब पार्टी पर मंडराया है खतरा
AajTak
चुनावी आंकड़े भी शिअद की गिरावट के बारे में बहुत कुछ बताते हैं. पार्टी को 2012 के विधानसभा चुनावों में 34.73 प्रतिशत वोट शेयर हासिल हुआ था जो 2017 और 2022 में गिरकर क्रमशः 30.6 प्रतिशत और 18.38 प्रतिशत हो गया. पार्टी का लोकसभा वोट शेयर भी गिरावट की ओर है.
देश की दूसरी सबसे पुरानी पार्टी शिरोमणि अकाली दल में मचा हुआ घमासान इन दिनों पंजाब की सियासत के सुर्खियों में है. पिछले कई चुनावों में लगातार मिली असफलता ने पार्टी के भीतर असंतोष को बढ़ाया है जिसके चलते कई नेताओं ने सुखबीर बादल के इस्तीफे की मांग तक की थी. हालत तब और गंभीर हो गए जब शिअद ने हाल ही में कोर कमेटी को ही भंग कर दिया. कहा गया कि सुखबीर बादल ने अपने खिलाफ विरोध को शांत करने के लिए ये कदम उठाया. लेकिन यहां सबसे जरूरी बात ये समझना है कि ये पहला मौका नहीं है जब शिअद में इस तरह के विरोध के स्वर उठे हैं. इससे पहले भी पार्टी में कई उतार-चढ़ाव आए हैं लेकिन इतिहास बताता है कि हमेशा शिअद मजबूती के साथ वापसी करती दिखी है.
जानें क्यों उठे विरोध के स्वर जानकार बताते हैं कि बार-बार चुनावी हार ने शिरोमणि अकाली दल (शिअद) में असंतोष पैदा किया. चुनावी आंकड़े भी शिअद की गिरावट के बारे में बहुत कुछ बताते हैं. पार्टी को 2012 के विधानसभा चुनावों में 34.73 प्रतिशत वोट शेयर हासिल हुआ था जो 2017 और 2022 में गिरकर क्रमशः 30.6 प्रतिशत और 18.38 प्रतिशत हो गया. पार्टी का लोकसभा वोट शेयर भी गिरावट की ओर है. यह 2019 में 27.76 प्रतिशत से घटकर 2024 में 13.42 प्रतिशत पहुंच गया.
बागियों के खिलाफ क्या है शिअद सुप्रीमो की प्लानिंग जिन 8 नेताओं ने खुलेआम विरोध किया था और सुखबीर बादल को घेरने के लिए "शिरोमणि अकाली दल सुधार लहर" अभियान चलाया, उन्हें अब कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है. कोर कमेटी को भंग करना एक ऐसा ही फैसला था. सूत्रों का कहना है कि पार्टी असहमति को दूर करने के लिए नई समिति के पुनर्गठन की प्रक्रिया में है.
इससे पहले बेअदबी मामले को लेकर भी सुखबीर सिंह पर कई सवाल उठे थे.जिसको लेकर सुखबीर बादल ने माफी मांगी थी. कहा था कि उन्हें पीड़ा है कि वो बेअदबी करने वालों को सजा नहीं दिला सके. इस मामले में सुखबीर ने लिखित माफी भी मांगी है, जिसपर अकाल तख्त फैसला सुना सकती है. बताया जा रहा है कि विरोध को शांत करने के लिए ये सुखबीर की रणनीति का हिस्सा है.
क्या कहता है शिअद का पुराना इतिहास जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक और इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट एंड कम्युनिकेशन (आईडीसी) के अध्यक्ष प्रोफेसर प्रमोद कुमार का कहना है कि अकाली दल में असंतोष का इतिहास पुराना है लेकिन जब भी पार्टी को नेतृत्व संकट का सामना करना पड़ा है तो यह पार्टी और मजबूत होकर उभरी है. उन्होंने बताया कि 1947 के बाद पार्टी का दो बार कांग्रेस में विलय हुआ. 1966 में जाटों ने मास्टर तारा सिंह को हटा दिया और फतेह सिंह को पार्टी प्रमुख बनाया. संकट 1997 में तब मंडराया जब गुरचरण सिंह टोहरा प्रमुख बन गए. लेकिन 1997 मोगा घोषणापत्र में शहरी हिंदुओं का उदय हुआ जिन्होंने शिरोमणि अकाली दल का समर्थन किया.
यह भी पढ़ें: पंजाब में शिअद और अकाली दल संयुक्त का विलय, ढींडसा बोले- सुखबीर बादल मेरे बेटे की तरह

दिल्ली सरकार के बजट को लेकर मंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में किए गए बड़े आवंटन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने बताया कि इस बार बजट में सबसे अधिक राशि शिक्षा के लिए निर्धारित की गई है, जो 19,000 करोड़ से ज्यादा है. इसके तहत स्मार्ट क्लासरूम, लाइब्रेरी और ICT लैब्स के विकास के लिए भी करोड़ों रुपये का प्रावधान किया गया है. हालांकि मंत्री ने यह भी कहा कि ये आंकड़े केजरीवाल गवर्नेंस मॉडल की वास्तविकता को उजागर करते हैं और इससे कई सवाल खड़े होते हैं.

रैसी जिले के महोर क्षेत्र में रामाकुंडा मोड़ के पास एक प्राइवेट कार सड़क से फिसलकर खाई में गिर गई. हादसे में हकनवाज (22), उनकी बहन शहरीजा राहि (18) और उनके चचेरे भाई रफ़ाकत हुसैन (15) की मौत हो गई. पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका महोर अस्पताल में इलाज चल रहा है. ड्राइवर ने अंधे मोड़ पर नियंत्रण खो दिया था.

Harish Rana Dies: हरीश राणा को मिल गई 'इच्छामृत्यु', एम्स में 10 दिन भर्ती रहने के बाद ली आखिरी सांस
Harish Rana News: भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति हरीश राणा का AIIMS में निधन हो गया. वे साल 2013 से कोमा में थे. सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिसके बाद अस्पताल में उनके लाइफ सपोर्ट को स्टेप वाइज हटाया गया. डॉक्टर सीमा मिश्रा की अगुवाई में विशेषज्ञ टीम ने पूरी प्रक्रिया पूरी की.

अहमदाबाद के लालदरवाजा इलाके में SDPI (सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया) ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. पुलिस की मंजूरी नहीं होने के कारण प्रदर्शन कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया. इस दौरान SDPI कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हल्का टकराव भी देखने को मिला. SDPI नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने विधानसभा में बहुमत के बल पर UCC बिल को मनमाने तरीके से पारित किया है और इसे मुस्लिम विरोधी बताया. मौके पर सुरक्षा बढ़ाकर स्थिति को नियंत्रित किया गया.

पश्चिमी एशिया में युद्ध के बीच भारत की चिंताएं तेल और गैस सप्लाई को लेकर बढ़ी हुई हैं. प्रधानमंत्री ने ताजा हालात की जानकारी सदन में बोलते हुए देश को दी. अब आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कर्तव्य भवन-2 में अहम बैठक की है. करीब डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक में CDS और तीनों सेनाओं के प्रमुख भी मौजूद रहे, जिन्होंने होर्मुज से तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चर्चा की. देखें वीडियो.








