
बांग्लादेशियों को बंगाल में शरण देने के लिए ममता ने दिया UN समझौते का हवाला... जानें क्या कहता है नियम?
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐलान किया है कि अगर हिंसा प्रभावित बांग्लादेश के लोग बंगाल के दरवाजे पर आएंगे तो उन्हें शरण दिया जाएगा. उन्होंने इसके लिए एक यूएन समझौते का भी हवाला दिया. आइए इस रिपोर्ट में जानते हैं कि क्या कोई भी राज्य किसी विदेशी को शरण दे सकता है या नहीं?
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि अगर हिंसा प्रभावित बांग्लादेश के लोग बंगाल के दरवाजे पर आएंगे तो वह उन्हें शरण देंगी. उन्होंने इसके लिए यूनाटेड नेशन समझौते का भी हवाला दिया, जिसमें सिग्नेटरी देशों से शरणार्थियों को शरण देने की बात कही गई है.
ममता का कहना है कि बांग्लादेश में हिंसा के मुद्दे पर वह कुछ नहीं बोलेंगी, क्योंकि यह केंद्र सरकार का काम है - लेकिन वहां के मजबूर लोग अगर आएंगे तो उन्हें शरण दिया जाएगा. आइए इस रिपोर्ट में जानते हैं कि क्या ममता बनर्जी अपने लेवल पर बांग्लादेश के संभावित शरणार्थियों को शरण दे सकती हैं?
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दरअसल, ममता बनर्जी जिस यूनाइटेड नेशन समझौते का हवाला दे रही हैं, उसमें भारत एक सिग्नेटरी नहीं है. मसलन, इस प्रस्ताव पर भारत के हस्ताक्षर नहीं हैं और ऐसे में भारत यूएन के इस प्रस्ताव के तहत किसी को भी नागरिकता नहीं देता है. भारत में शरणार्थियों पर अपने नियम-कानून हैं, जिसके तहत किसी को शरण देने का प्रावधान है. किसी विदेशी नागरिक को शरणार्थी स्टेटस देने का अधिकार राज्यों को नहीं है.
शरणार्थियों पर क्या है भारत का स्टैंड?
लोकसभा में सांसद सुगाता रॉय के एक सवाल पर गृह मंत्रालय ने 16 मार्च 2021 को अपने जवाब में कहा था कि भारत शरणार्थियों की स्थिति से संबंधित 1951 के यूएन समझौते और उस पर 1967 के प्रोटोकॉल पर सिग्नेटरी नहीं है. मंत्रालय का कहना था कि सभी विदेशी नागरिक (शरण चाहने वालों सहित) को फॉरेनर्स एक्ट-1946, रजिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेनर्स एक्ट-1939, पासपोर्ट (एंट्री इंटू इंडिया) एक्ट-1920 और सिटिजनशिप एक्ट-1955 के तहत शासित किया जाता है.

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