
फ्री किताबों का इतना बड़ा घोटाला! कबाड़ के ढेर में मिलीं हजारों किताबें, हड़कंप
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अभिभावकों ने झिझकते हुए हमें बताया कि “हमने कई बार शिक्षकों के सामने इस मुद्दे को उठाया है, यहां तक कि सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल से भी इस मुद्दे को उठाया है, लेकिन आश्वासन के अलावा हमें कुछ नहीं मिला है. मेरे बच्चों को कुछ ही दिनों में अपनी परीक्षा देनी है. हमने अपने रिश्तेदारों से पाठ्यपुस्तकें उधार ली हैं ताकि परीक्षा बिना किसी बाधा के हो सके.
रायपुर में बच्चों को मुफ्त में दी जाने वाली किताबों के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. 'निशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण' कार्यक्रम के तहत कई सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ी है, लेकिन इस सफलता के पीछे एक बड़ा घोटाला समाने आया है. लाखों किताबें, जो बच्चों के लिए बनी थीं, उन्हें कबाड़ के रूप में बेच दिया गया है. ये किताबें रायपुर से 30 किलोमीटर दूर एक रिसाइकिलिंग सेंटर में पाई गईं. इससे साफ है कि बच्चों की शिक्षा के साथ खिलवाड़ किया गया है.
जांच के लिए समिति का गठन
इस घोटाले को उजागर करने वाले पूर्व कांग्रेस विधायक विकास उपाध्याय ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह आरोप लगाया है कि पाठ्यपुस्तकों को कबाड़ कंपनियों को बेच दिया गया, जिससे वे नष्ट हो गईं. सरकार ने अब छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के एमडी IAS राजेंद्र कटारा के नेतृत्व में एक समिति बनाकर गहन जांच शुरू की है. इस समिति का उद्देश्य भ्रष्टाचार की सीमा को उजागर करना और दोषियों को जवाबदेह बनाना है. भाजपा के युवा नेता गोरी शंकर श्रीवास अपनी सरकार का प्रभावी ढंग से बचाव करते नजर आए. उन्होंने कहा कि “कोरोना काल में जब छात्र ऑनलाइन कक्षाएं ले रहे थे, तब लाखों पुस्तकें प्रकाशित हुईं और कबाड़ में बेच दी गईं.
घोटाले से परेशान अभिभावक
छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम को भ्रष्टाचार का अड्डा बनाने वाले लोग अब हम पर उंगली उठा रहे हैं? भाजपा सरकार अपनी जिम्मेदारी समझती है और इस मामले को गंभीरता से साबित कर रही है. राजनीति को इस संवेदनशील मुद्दे से दूर रखना चाहिए. इंडिया टुडे ने इस मामले को उन अभिभावकों तक पहुंचाया जो इस शैक्षणिक वर्ष में अपने बच्चों के लिए मुफ्त पाठ्यपुस्तकें खरीदने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इन अभिभावकों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की क्योंकि उनके बच्चे इस बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के कारण बिना पाठ्यपुस्तकों के आगामी परीक्षाओं का सामना कर रहे हैं. रायपुर के स्थानीय स्कूलों ने पहले ही इसका असर महसूस किया है और संभावना है कि यह भ्रष्टाचार और भी दूरदराज के जिलों तक फैल गया है.
कई बार इस मुद्दे पर हो चुकी है बात, लेकिन कोई समाधान नहीं

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












