
फोन टैपिंग मामला: सुप्रीम कोर्ट से राजस्थान सरकार को बड़ी राहत, केंद्र सरकार के खिलाफ दायर मुकदमा वापस लेने की मिली इजाजत
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राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में केस वापस लेने के लिए अर्जी दायर करते हुए कहा था कि इस केस में कोई मैरिट नहीं बनती है. फोन टैपिंग कांड के बाद पूर्ववर्ती गहलोत सरकार ने यह तर्क दिया गया था कि फोन टैपिंग की जांच दिल्ली पुलिस के क्षेत्राधिकार में नहीं है और केवल राजस्थान पुलिस को इस एफआईआर की जांच करनी चाहिए.
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से जुड़े फोन टैपिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से राजस्थान सरकार को बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार द्वारा केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से जुड़े फोन टैपिंग मामले में केंद्र सरकार के खिलाफ दायर मुकदमा वापस लेने की इजाजत दी. राजस्थान में कांग्रेस की सरकार के बदलने के साथ ही नई बीजेपी सरकार के रुख में भी बदलाव आ गया था.
दरअसल, राजस्थान की भजनलाल सरकार ने फोन टैपिंग मामले में केंद्र सरकार के खिलाफ दायर मुकदमा वापस लेने का फैसला लेते हुए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी. ये मुकदमा राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में दायर किया गया था.
राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में केस वापस लेने के लिए अर्जी दायर करते हुए कहा था कि इस केस में कोई मैरिट नहीं बनती है. फोन टैपिंग कांड के बाद पूर्ववर्ती गहलोत सरकार ने यह तर्क दिया गया था कि फोन टैपिंग की जांच दिल्ली पुलिस के क्षेत्राधिकार में नहीं है और केवल राजस्थान पुलिस को इस एफआईआर की जांच करनी चाहिए.
उसके बाद नई सरकार के अस्तित्व में आने बाद राजस्थान सरकार की तरफ से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि रिकॉर्ड और मामले के तथ्यों व परिस्थितियों की गहन जांच पड़ताल की गई. इसमें सामने आया कि मैरिट पर मामला सुप्रीम कोर्ट में चलने लायक नहीं है. इस कारण इसे आगे बढ़ाने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा. इन वजह से न्याय हित में सुप्रीम कोर्ट का समय बचाने के लिए मामला वापस लेने का निर्णय किया.
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार की इस दलील को सुनने के बाद केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से जुड़े फोन टैपिंग के मामले में दायर केंद्र के खिलाफ अर्जी को वापस लेने की इजाजत दे दी है.

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