
फारस की खाड़ी के ‘अनाथ मोती’ पर हमला बन सकता है तीसरे विश्वयुद्ध की वजह, जानें ईरान के खार्ग द्वीप की पूरी कहानी
AajTak
फारस की खाड़ी का छोटा सा खार्ग द्वीप ईरान की तेल लाइफलाइन है. इसी द्वीप से 90% तेल निर्यात होता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस पर हमला हुआ तो मिडिल ईस्ट में बड़ा युद्ध और वैश्विक तेल संकट पैदा हो सकता है. पढ़ें इस छोटे मगर अहम द्वीप के बनने की पूरी कहानी.
Orphan Pearl of the Persian Gulf: ईरान की बुशहर बंदरगाह से 55 किलोमीटर आगे और ईरान की सरहदी जमीन से सिर्फ 28 किलोमीटर के फासले पर मौजूद है ‘ऑर्फन पर्ल ऑफ द पर्शियन गल्फ’ यानी फारस की खाड़ी का अनाथ मोती. जिसका असली नाम खार्ग आईलैंड है, जिसे कभी खारक, खाराज या खारेज के नाम से भी जाना गया. सिर्फ 8 किलोमीटर लंबा और 5 किलोमीटर चौड़ा ये वो द्वीप है जो अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग को ना सिर्फ तीसरे विश्वयुद्ध में बदल सकता है बल्कि पूरी दुनिया को तिल-तिल के लिए तेल से तरसा सकता है.
एक हमला और चार बड़े संकट अगर ईरान पिछले 13 दिनों से सुपर पावर अमेरिका और इजरायल से एक साथ लोहा ले रहा है तो सिर्फ और सिर्फ इस एक आईलैंड की वजह से. वो सिर्फ एक आईलैंड नहीं है, बल्कि ईरान की लाइफलाइन है. दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल उत्पादन करने वाले ईरान के तेल का 90 फीसदी कारोबार इसी एक छोटे आईलैंड से ही चलता है. बस यूं समझ लीजिए कि अगर इस एक आईलैंड पर अमेरिका या इजरायल ने गलती से भी हमला कर दिया तो एक साथ चार चीजें होंगी. तीसरा विश्वयुद्ध, पूरी मिडिल ईस्ट की बर्बादी, पूरी दुनिया में तेल के लिए हाहाकार और ईरान का कंगाल होना.
अमेरिका की रेड लाइन क्यों है खार्ग? दरअसल, अमेरिका के लिए ये खार्ग आईलैंड एक रेड लाइन है. एक ऐसी लक्ष्मण रेखा जिसे ना ट्रंप पार कर सकते हैं, ना उनसे पहले के किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पार करने की कोशिश की. क्योंकि अंजाम सबको पता है. इस आईलैंड पर हमले का मतलब है ईरान का ऐसा पलटवार, जो इससे पहले कभी दुनिया ने देखा ही ना हो. बस यही वजह है कि जंग के 13 दिन बीत चुके हैं. ईरान अब भी अमेरिका और इजरायल को घायल कर रहा है. अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के तमाम ठिकानों पर बमबारी कर रहे हैं. लेकिन इस एक आईलैंड पर इन 13 दिनों में अमेरिका और इजरायल ने एक भी बम नहीं गिराया. बल्कि उल्टे आलम ये है कि एक तरफ पूरा ईरान जंग लड़ रहा है और दूसरी तरफ उसी ईरान के इस छोटे से द्वीप से आम दिनों की तरह अब भी दुनिया को तेल की सप्लाई जारी है.
इतना अहम क्यों है खार्ग द्वीप? आखिर क्या है ये खार्ग द्वीप? और क्यों इतना अहम है कि इस एक द्वीप पर हमले से तीसरा विश्वयुद्ध छिड़ सकता है? और सबसे बड़ा सवाल ये है कि ये द्वीप ईरान के लिए इतना खास क्यों है? और अमेरिका व इजरायल को ये खौफ क्यों है कि इस एक द्वीप के चलते पूरी दुनिया जंग की चपेट में आ जाएगी? तो चलिए 8 किलोमीटर लंबे और 5 किलोमीटर चौड़े इस द्वीप की वो कहानी सुनाते हैं, जिसे सुनने के बाद आप खुद मानने को मजबूर हो जाएंगे कि ये एक द्वीप पूरी दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध में झोंक सकता है.
पुर्तगाल से लेकर ईरान तक का सफर पुर्तगालियों और डच ईस्ट इंडिया कंपनी से होते हुए कई हाथों से गुजर कर ये छोटा सा खार्ग आईलैंड 20वीं सदी में ईरान का हिस्सा बना. 1925 से 1941 तक ईरान के शाह रहे रजा शाह पहलवी के दौर में इस द्वीप का इस्तेमाल राजनीतिक कैदियों को रखने के लिए किया जाता था. क्योंकि ये ईरान की सरहदी जमीन से अलग एकांत में एक ऐसा द्वीप था, जैसा ठीक अंग्रेजों के वक्त में अंडमान-निकोबार यानी काला पानी. हालांकि रजा शाह पहलवी की हुकूमत से करीब 17 साल पहले ही 1908 में ईरान में तेल के भंडार का पता चल चुका था. लेकिन ईरान में असल में मॉडर्न पेट्रोलियम दौर की शुरुआत 1958 में हुई, जब उन्हें तेल और गैस की अहमियत का अंदाजा हुआ. 1960 तक विदेशी निवेश और कंपनियों की मदद से ईरान एक बड़े ऑयल एक्सपोर्ट सेंटर के तौर पर उभरना शुरू हुआ.
गहरे समुद्र ने बदल दी खार्ग की किस्मत दरअसल, दुनिया भर के जिन बंदरगाहों पर बड़े-बड़े जहाज डॉक करते हैं, यानी आकर लंगर डालते हैं, उन जहाजों को डॉक करने के लिए उस जगह पर काफी गहराई की जरूरत होती है. ईरान के जितने भी बंदरगाह हैं, जिनमें होर्मुज तक शामिल है, उन सबके मुकाबले खार्ग द्वीप की खासियत ये है कि बेहद छोटा होने के बावजूद यहां समंदर की गहराई काफी ज्यादा है. इस गहराई का फायदा ये होता है कि तेल ढोने वाले दुनिया के जो सबसे बड़े जहाज होते हैं, वो भी यहां आसानी से डॉक कर सकते हैं. बस इसी खासियत के चलते ईरान ने तय किया कि वो अपने देश का तेल दुनिया के बाजार में इसी रास्ते से भेजेगा.

ईरान युद्ध से संबंधित चर्चा में बीजेपी के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि भारत अपनी रणनीति में अपने हितों को ध्यान में रखकर संतुलन बनाए हुए आगे बढ़ रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी की नीति गैर-मित्रता नहीं है बल्कि यह सभी के साथ मित्रता की नीति है. इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस प्रवक्ता के बीच जमकर बहस हुई. देखें वीडियो.

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 में तमिलनाडु की राजनीति और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर डीएमके, एआईएडीएमके, कांग्रेस और बीजेपी नेताओं के बीच हुई बहस में कई बातें सामने आईं. कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा चुनावों में मुद्दा बन सकते हैं, लेकिन टीवीके नेता थलपति विजय का चुनावों में खास प्रभाव हो सकता है.

ईरान युद्ध के कारण उभरते ऊर्जा संकट के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में तेल की कोई कमी नहीं है. सरकार ने जनता से अपील की है कि वे खुले कंटेनरों में तेल न लें और पेट्रोल पंप की गाइडलाइन का कड़ाई से पालन करें. यह निर्देश ईंधन संकट के समय आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया है. सरकार इस बात पर जोर देती है कि कोई आवश्यकता से अधिक तेल स्टॉक न करें ताकि बाजार में तेल की उपलब्धता बनी रहे और आम जनता को परेशानी न हो.

उत्तर प्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा से पहले पेपर लीक के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है. टेलीग्राम पर बने कुछ चैनलों पर 25 हजार रुपये में परीक्षा का पेपर देने का दावा किया जा रहा था. भर्ती बोर्ड की शिकायत पर लखनऊ के हुसैनगंज थाने में इस मामले में दूसरी FIR दर्ज की गई है. पुलिस अब डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इन टेलीग्राम चैनलों के संचालकों की पहचान में जुटी है.









