
प्रियंका गांधी पर सिंधिया की टिप्पणी तो आ गयी - राहुल गांधी के बारे में क्या ख्याल है?
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प्रियंका गांधी के बयान के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी प्रतिक्रिया में कांग्रेस महासचिव को पार्ट टाइम नेता बताया है. राहुल गांधी के बारे में अब तक बीजेपी की यही राय रही है, क्या सिंधिया BJP के नजरिये में किसी तरह के बदलाव का संकेत दे रहे हैं?
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने राजनीतिक जीवन का लंबा हिस्सा कांग्रेस में बिताया है. बीजेपी में आये तो अभी महज तीन साल ही हुए हैं. उनके पिता माधव राव सिंधिया जरूर कांग्रेसी रहे, लेकिन दादी विजयराजे सिंधिया भाजपाई रहीं, और दोनों बुआ भी बीजेपी में ही हैं. यशोधरा राजे ने तो मध्य प्रदेश की चुनावी राजनीति को करीब करीब अलविदा भी कह दिया है, लेकिन वसुंधरा राजे अब भी राजस्थान में मुख्यमंत्री पद की दावेदार बनी हुई हैं.
सिंधिया, राहुल गांधी के कॉलेज के दोस्त रहे हैं, और 2019 के लोक सभा चुनाव में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ काम भी किया है. वो कांग्रेस की अगुवाई वाली मनमोहन सिंह सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं. 2020 में मध्य प्रदेश में बगावत कर सिंधिया ने कमलनाथ की सरकार गिरा दी थी, लेकिन काफी दिनों तक वो कांग्रेस नेताओं के खिलाफ सीधे सीधे कुछ बोलने से परहेज करते देखे जाते रहे.
कांग्रेस के खिलाफ जब सिंधिया ने बोलना शुरू किया तो कमलनाथ और दिग्विजय सिंह पर सिर्फ हल्के फुल्के हमले बोल कर चुप हो जाते रहे. धीरे धीरे वो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को भी कठघरे में खड़ा करने लगे, लेकिन मध्य प्रदेश के चुनावी माहौल में प्रियंका गांधी की टिप्पणी के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया खुल कर मैदान में कूद पड़े हैं - क्योंकि बाद परिवार की प्रतिष्ठा पर आ गयी है.
एक चुनावी रैली में प्रियंका गांधी ने सिंधिया के परिवार के साथ साथ उनकी हाइट का जिक्र कर कुछ ज्यादा ही पर्सनल अटैक कर दिया है, ऐसे में सिंधिया का तिलमिला उठना स्वाभाविक है - अपने रिएक्शन में सिंधिया ने प्रियंका गांधी को पार्ट टाइम नेता बताया है.
बीजेपी की तरफ से ऐसा तमगा राहुल गांधी को ही मिलता रहा है. बीजेपी नेता हमेशा ही राहुल गांधी को पार्ट टाइम पॉलिटिशियन बताते रहे हैं, लेकिन सिंधिया ने अब ये खिताब प्रियंका गांधी वाड्रा को दे डाला है.
ऐसे में क्या माना जाये कि सिंधिया, राहुल गांधी को फुल टाइम नेता मान चुके हैं? और ऐसा क्या वो राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के बाद मानने लगे हैं? क्योंकि जब यात्रा शुरू हुई तो किसी को यकीन नहीं था कि राहुल गांधी कब तक यात्रा में बने रहेंगे, लेकिन वो तो सबको गलत साबित करने के लिए पूर्णाहूति तक मैदान में डटे रहे.

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