
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एम एस गिल का निधन, मनमोहन सरकार में रह चुके थे मंत्री
AajTak
देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त मनोहर सिंह गिल का निधन हो गया है. तबीयत खराब होने के बाद उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां उन्होंने आखिरी सांस ली. वह मनमोहन सिंह सरकार में खेल मंत्री भी रह चुके थे.
देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त और कांग्रेस नेता मनोहर सिंह गिल का रविवार को निधन हो गया. उन्होंने 86 वर्ष की उम्र में आखिरी सांस ली. डॉ. गिल का अंतिम संस्कार आज यानी सोमवार को दिल्ली में किया जाएगा. मनमोहन सिंह की सरकार में खेल मंत्री रहे गिल को साउथ दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
निर्वाचन आयोग ने पूर्व मुख्य आयुक्त डॉक्टर मनोहर सिंह गिल के निधन पर शोक जताया है. सीईसी राजीव कुमार, आयुक्त अनूप चंद्र पांडेय और अरुण गोयल ने गिल के निधन को आयोग के लिए अपूरणीय क्षति बताया है.
देश के मुख्य चुनाव आयुक्त कब रहे थे डॉ. गिल?
एम एस गिल दिसंबर 1996 से 13 जून 2001 तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त रहे. डॉक्टर गिल चर्चित सीईसी टीएन शेषन के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त बने थे. साल 1998 और 1999 में 12वीं और 13वीं लोकसभा के आम चुनाव को डॉ. गिल के सीईसी रहते हुए ही आयोजित किए गए थे.
देश के 11वें राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के अलावा 20 से ज्यादा राज्यों के विधानसभा चुनाव भी डॉ. गिल ने अपने कार्यकाल में कराए थे. एम एस गिल को सिविल सेवक के रूप में असाधारण और विशिष्ट सेवाओं के लिए साल 2000 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था. डॉ. गिल को कांग्रेस ने राज्यसभा भेजा था और उसके बाद यूपीए-1 में मनमोहन सरकार में उन्हें केंद्रीय खेल मंत्री बनाया गया था.
मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी जताया शोक

अमेरिका ने ब्रिटेन, फ्रांस,इजरायल और चार अरब देशों के साथ मिलकर ईरान पर हमले की गुप्त टारगेट लिस्ट तैयार की है. मेन टारगेट न्यूक्लियर साइट्स (फोर्डो, नंटाज, इस्फाहान), IRGC कमांडर्स, बैलिस्टिक मिसाइल फैक्ट्रीज और स्ट्रैटेजिक बेस हैं. ट्रंप ने प्रदर्शनों और न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर धमकी दी है, लेकिन अभी हमला नहीं हुआ. अरब देश युद्ध से डर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियमों पर रोक लगा दी है. छात्रों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि यूजीसी का यह कानून छात्रों में भेदभाव उत्पन्न करता है. छात्रों का कहना है कि वे नियमों में बदलाव नहीं बल्कि पुराने नियमों को वापस चाहते हैं. यदि नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया तो वे भविष्य में भी प्रदर्शन जारी रखेंगे.

जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के बाद उनके पैतृक गांव में समाधि दी जाएगी. जुकाम के इलाज में लगाए गए इंजेक्शन के महज 30 सेकंड बाद तबीयत बिगड़ने से मौत का दावा किया जा रहा है. घटना से संत समाज में गहरी नाराजगी है. संतों ने निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सोशल मीडिया पर अनर्गल लिखने वालों पर कार्रवाई की मांग की है.

दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने सार्वजनिक शिकायतों के निपटारे में लापरवाही के आरोपों पर राजेंद्र नगर, कन्हैया नगर और अशोक विहार के जोनल रेवेन्यू अधिकारियों और कन्हैया नगर के एक असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर को सस्पेंड कर दिया. अचानक निरीक्षण में प्रशासनिक खामियां मिलने के बाद उन्होंने विभागीय कार्रवाई और प्रभावित जोनों में तत्काल नए अधिकारियों की तैनाती के आदेश दिए हैं.

देश के शिक्षण संस्थानों में दलित और आदिवासी छात्रों और शिक्षकों के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने के लिए विश्विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नए नियम लागू किए थे, जिसे लेकर विरोध इतना बढ़ गया कि मामला अदालत तक पहुंच गया. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है, जिसे लेकर राजनीतिक दलों के नजरिए अलग-अलग दिखे.

दक्षिण मुंबई के फोर्ट इलाके में पुलिसकर्मी बनकर एक केन्याई महिला से 66 लाख रुपये की ठगी करने के मामले में पुलिस ने ठाणे से 48 वर्षीय सुरेश रंगनाथ चव्हाण को गिरफ्तार किया है. उसका एक साथी अभी फरार है. 21 जनवरी को एम. जी. रोड पर आरोपी ने अपने साथी के साथ महिला की टैक्सी रोककर जांच के बहाने 66.45 लाख रुपये से भरे बैग जब्त किए और पुलिस स्टेशन चलने का कहकर फरार हो गया.







