
जेल से बाहर आए सोनम वांगचुक, बोले- लड़ाई अभी खत्म नहीं, पूरी हों लद्दाख की मांगें
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करीब छह महीने हिरासत में रहने के बाद रिहा हुए सोनम वांगचुक ने दिल्ली में कहा कि उनकी लड़ाई पूरे लद्दाख के हक की है. उन्होंने अनशन को मजबूरी बताया और सरकार के बातचीत प्रस्ताव का स्वागत किया. साथ ही स्पष्ट किया कि सिक्स्थ शेड्यूल और राज्य का दर्जा जैसी मांगें पूरी होने पर ही असली जीत मानी जाएगी.
करीब 6 महीने हिरासत में रहने के बाद रिहा हुए लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने मंगलवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखी. उन्होंने साफ कहा कि यह लड़ाई सिर्फ उनकी नहीं बल्कि पूरे लद्दाख के लोगों की है और वह इसे तभी जीत मानेंगे जब लद्दाख का असली भला होगा.
सोनम वांगचुक ने कहा कि वह व्यक्तिगत जीत को महत्वपूर्ण नहीं मानते. उनके लिए असली जीत तब होगी जब लद्दाख के लोगों की मांगें पूरी होंगी और वहां के भविष्य को सुरक्षित किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि जेल में रहते हुए भी उन्हें पूरा भरोसा था कि न्याय मिलेगा और कोर्ट में उनकी जीत होगी.
साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से विश्वास था कि अदालत में उनका पक्ष मजबूत है. जेल में रहते हुए भी यही भरोसा बना रहा. लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं है, बल्कि पूरे समाज की है और इसका परिणाम भी समाज के हित में होना चाहिए.
रिहाई के बाद वांगचुक का पहला बयान
रिहाई के बाद केंद्र सरकार की तरफ से बातचीत की पेशकश पर वांगचुक ने सकारात्मक रुख दिखाया. उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम से वह खुश हैं और इसे एक विन विन सिचुएशन मानते हैं. उनके अनुसार इससे सरकार की छवि भी बेहतर होगी और आंदोलन कर रहे लोगों को भी अपनी बात रखने का मौका मिलेगा.
इसके अलावा उन्होंने कहा कि लद्दाख में जो भी आंदोलन हुए हैं, उनका उद्देश्य हमेशा से संवाद शुरू कराना रहा है. उन्होंने बताया कि लोग लेह से दिल्ली तक पैदल चले, अनशन किया और कई तरह के शांतिपूर्ण तरीके अपनाए, सिर्फ इसलिए कि सरकार बातचीत शुरू करे.

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