
तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रेड सी संकट ने हाईवे प्रोजेक्ट को किया प्रभावित, भारत के इंफ्रा सेक्टर पर असर
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मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और रेड सी संकट ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन टूटने से परेशान हाईवे डेवलपर्स ने अब NHAI का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने इस वैश्विक संकट को 'फोर्स मेज्योर' घोषित करने की मांग की है.
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और रेड सी में बढ़ते संकट के कारण भारत के हाईवे निर्माण क्षेत्र पर गहरा असर पड़ रहा है. इसी बीच हाईवे डेवलपर्स ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से अपील की है कि वो मिडिल ईस्ट संघर्ष को फोर्स मेज्योर घटना मानते हुए सड़क परियोजनाओं को राहत दी जाए. इस संबंध में डेवलपर्स ने NHAI को एक ज्ञापन भी सौंपा है.
डेवलपर्स ने NHAI को दिए ज्ञापन में कहा है कि भले ही संघर्ष भारत से भौगोलिक रूप से दूर है, लेकिन इसके वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री परिवहन पर पड़ने वाले प्रभाव से देशभर में हाईवे निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है.
डेवलपर्स का कहना है कि हाईवे निर्माण में बिटुमेन और डीजल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है.
डेवलपर्स का तर्क है कि इन पेट्रोलियम आधारित इनपुट्स की बढ़ती लागत ने प्रोजेक्ट का बजट बिगाड़ दिया है. रेड सी क्षेत्र में शिपिंग रूट प्रभावित होने से माल ढुलाई और बीमा की दरें भी आसमान छू रही हैं. इससे न केवल निर्माण सामग्री महंगी हुई है, बल्कि विदेशों से आने वाली मशीनों की डिलीवरी में भी काफी वक्त लग रहा है.
'फोर्स मेज्योर' के तहत मांगी राहत
वहीं, मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट (HAM, BOT और EPC) के तहत युद्ध या बड़े संघर्ष की स्थिति में 'फोर्स मेज्योर' का प्रावधान होता है. इसके जरिए डेवलपर्स को कानूनी और वित्तीय राहत मिल सकती है.

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