
पाब्लो एस्कोबार से एल मेंचो तक... वो ताकतवर ड्रग लॉर्ड, जिनसे अमेरिका भी डरता था!
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एल मेंचो मैक्सिको में 'कार्टेल जलिस्को नुएवा जेनरेशन' नाम से ड्रग्स तस्करी का धंधा चला रहा था. इसे मैक्सिकन मिलिट्री ने एक ऑपरेशन के दौरान मार गिराया है. मेंचो से पहले भी मैक्सिको और कोलंबिया में एक से बढ़कर एक कार्टेल लीडर और ड्रग माफिया रहे हैं. पाब्लो एस्कोबार और एल चापो जैसे माफिया से तो पूरी दुनिया वाकिफ है. ऐसे में नजर डालते हैं मैक्सिको और कोलंबिया के इन बड़े ड्रग माफियाओं की कहानी पर.
मैक्सिको में ड्रग माफिया 'एल मेंचो' की मौत के बाद से जगह-जगह हिंसा भड़क गई है.एक मिलिट्री ऑपरेशन में इस कार्टेल लीडर को मार गिराया गया. मैक्सिको के लिए ये कोई नई बात नहीं है. कोकीन जैसे मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ी कार्टेल्स संस्कृति छोटे-छोटे लैटिन अमेरिकी देशों में इतनी गहराई से पैठ बना चुकी है कि इसे जड़ से उखाड़ पाना अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश के लिए भी मुश्किल है.
इन ड्रग्स माफिया और कार्टेल्स ने दशकों से अमेरिका को परेशान कर रखा है. क्योंकि अमेरिका दुनिया भर में कोकीन का सबसे बड़ा उपभोक्ता है. इसके अलावा हेरोइन से लेकर मारिजुआना तक कई अन्य नशीले पदार्थों की भी अमेरिका में भारी डिमांड रहती है. अमेरिकी लोगों के इस डिमांड को मैक्सिको और कोलंबिया जैसे लैटिन अमेरिकी देशों में बैठे पाब्लो एस्कोबार, एल चेपो, मिगुएल एंजेल फेलिक्स गैलार्डो, अमाडो कैरिलो जैसे ड्रग्स लॉर्ड्स पूरा करते आए हैं. ये ड्रग माफिया किसी समय इतने शक्तिशाली थे कि इनका एक सामानांतर शासन कोलंबिया और मैक्सिको जैसे देशों में चलता था.
कोकीन जैसे प्रतिबंधित ड्रग्स कोलंबिया और मैक्सिको जैसे देशों से अमेरिका कैसे पहुंचा इसे समझने के लिए मैक्सिको और कोलंबिया के बड़े कार्टेल लीडर की कहानी जानना जरूरी है. अधिकांश लोग पाब्लो एस्कोबार की कहानियों का हवाला देकर यह मान सकते हैं कि सारा कोकीन सीधे कोलंबिया से आता है. यह सही भी है, लेकिन कोलंबिया से अमेरिका तक कोकीन को पहुंचाने में मैक्सिको का बड़ा रोल रहा है. कोलंबियन ड्रग्स लीडर्स को 70 और 80 के दशक में अमेरिका तक कोकीन पहुंचाने में जब मुश्किल होने लगी, तब उन्होंने मैक्सिको के छोटे-छोटे हिस्से में फैले गांजे की तस्करी करने वाले गैंग का सहारा लेना शुरू किया.
कोलंबिया से मैक्सिको तक कोकीन स्मगलिंग का जाल मैक्सिको के छोटे-छोटे गांजा तस्कर, जिनमें सिनालोआ कार्टेल, ग्वाडाहारा कार्टेल, कैलिफोर्निया बाजा गैंग जैसे छोटे ग्रुप शामिल थे. इनका अपना स्मगलिंग रूट था, जिसके जरिये ये अमेरिका तक गांजा पहुंचाते थे. इन छोटे गैंग के तस्करी के रास्तों का फायदा उठाने के लिए कोलंबियन कोकीन तस्कर - कैली कारटेल और पाब्लो एस्कोबार जैसे बड़े ड्रग लॉर्ड्स ने मैक्सिकन कारटेल्स से हाथ मिलाया.
पाब्लो एस्कोबार... दुनिया का सबसे बड़ा ड्रग लॉर्ड अमेरिका में जब्त की गई 95 प्रतिशत कोकीन कोलंबिया में उत्पादित होती है. एक समय अमेरिका में इस कोकीन का सबसे बड़ा सप्लायर कोलंबिया और पूरी दुनिया का अब तक का सबसे खूंखार और बड़ा ड्रग तस्कर पाब्लो एस्कोबार था. इसका पूरा नाम पाब्लो एमिलियो एस्कोबार गैविरिया था. यह कोलंबिया के मेडेलिन शहर में रहता था. यही वजह है कि एस्कोबार के कार्टेल का नाम मेडेलिन कार्टेल था. हालांकि, पाब्लो का जन्म कोलंबिया के रियोनेग्रो शहर में हुआ था. उसके पिता किसान थे और उसका बचपन गरीबी में बीता था. उसने शुरुआत सड़कों पर चोरी और छोटे-मोटे स्मगलिंग से की. 1970 में वह कोकीन तस्करी के कारोबार में उतार और फिर मेडेलिन कार्टेल की स्थापना की. 80 के दशक में अमेरिका और यूरोप में सप्लाई होने वाला 80 प्रतिशत कोकीन मेडेलिन कार्टेल का था.
कोकीन की तस्करी कर पाब्लो दुनिया का सातवां सबसे धनी इंसान बन गया था. 1989 में फोर्ब्स ने पाब्लो एस्कोबार को दुनिया का सातवां सबसे अमीर शख्स बताया था. ड्रग्स के पैसे से उसने कोलंबिया में कई अच्छे काम भी किए और इस तरह उसने वहां की राजनीति में भी अच्छी खासी पकड़ बना ली. कहा तो यहां तक जाता है कि एक समय वह पर्दे के पीछे से कोलंबिया की सरकार यानी पूरा देश चलाता था. इस पाब्लो एस्कोबार ने अमेरिका तक ड्रग्स पहुंचाने के लिए मैक्सिको के ड्रग्स तस्कर मिगुएल एंजेल फेलिक्स गैलार्डो से भी हाथ मिलाया था. हालांकि, मिगुएल का बड़ा धंधा केली कारटेल के साथ था और इस तरह कोलंबियन कारटेल के सहयोग से ही मैक्सिको में भी कोकीन ड्रग माफिया शक्तिशाली होते गए. क्योंकि आने वाले समय में मिगुएल मैक्सिको के सभी कारटेल्स के बीच सबसे बड़ा नाम बन गया था.

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