
पाकिस्तान को एक और झटका! चिनाब नदी पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को मिली रफ्तार, भारत ने जारी किया ग्लोबल टेंडर
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भारत की प्रमुख केंद्र-स्वामित्व वाली एजेंसी नेशनल हाइड्रोपावर कॉरपोरेशन (NHPC) ने 29 जुलाई को जम्मू और कश्मीर में चिनाब नदी पर 1,856 मेगावाट के सावलकोट हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के लिए ग्लोबल टेंडर मांगे हैं. रामबन जिले के सिद्धू गांव के पास स्थित सावलकोट जलविद्युत परियोजना, 900 मेगावाट की बगलिहार परियोजना को पीछे छोड़ते हुए, जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना बनने की ओर अग्रसर है.
सिंधु जल संधि (IWT) को स्थगित करने के कुछ महीनों बाद भारत अब चिनाब नदी पर लंबे समय से अटके हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इसकी परिकल्पना छह दशक पहले की गई थी, लेकिन पाकिस्तान के साथ इसी संधि के कारण यह परियोजना रुकी हुई थी. भारत ने एक ग्लोबल टेंडर जारी किया है, जो सिंधु जल प्रणाली पर उसकी रणनीति में एक निर्णायक बदलाव को दर्शाती है.
हाइड्रोपावर विकास के लिए भारत की प्रमुख केंद्र-स्वामित्व वाली एजेंसी नेशनल हाइड्रोपावर कॉरपोरेशन (NHPC) ने 29 जुलाई को जम्मू और कश्मीर में चिनाब नदी पर 1,856 मेगावाट के सावलकोट हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के लिए ग्लोबल टेंडर मांगे हैं.
बता दें कि पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद अप्रैल में सिंधु जल संधि (IWT) के निलंबन के बाद भारत अब अपनी हाइड्रोपावर क्षमता को अधिकतम करने के लिए पश्चिमी नदी, जो पहले संधि के तहत पाकिस्तान को आवंटित थी, का पूरी तरह से इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
सावलकोट हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का विकास जुलाई में पर्यावरण मंत्रालय के पैनल द्वारा इसकी स्वीकृति और इसे राष्ट्रीय महत्व की परियोजना के रूप में नामित किए जाने के बाद हुआ है, जिससे एनएचपीसी 29 जुलाई को 200 करोड़ रुपये का टेंडर जारी कर सकी, जिससे लालफीताशाही कम हुई और निर्माण के लिए मंज़ूरी में तेजी आई.
सिंधु जल संधि के कारण रुका था काम

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