
पहले देशद्रोह का चार्ज, अब राहतों की बौछार... कैसे पलट गई शहला राशिद और हार्दिक पटेल की कहानी!
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जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शहला राशिद और पाटीदार आंदोलन के कर्ताधर्ता हार्दिक पटेल. दोनों की राजनीति में 360 डिग्री का टर्न आया है. मुखर बीजेपी विरोध, आंदोलन और अभियान के बाद ये दोनों ही युवा नेता अब केंद्र की नीतियों से हामी रखते हैं, हार्दिक तो बीजेपी विधायक भी है. इस बीच दो बीजेपी शासित सरकारों ने इनके खिलाफ चल रहे देशद्रोह के मुकदमों को वापस ले लिया है.
देश की अदालतों के गलियारे से पिछले एक सप्ताह में दो अहम खबरें सामने आई हैं. कभी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ मुखर और विरोध की तीव्र आवाजों में शुमार शहला राशिद और हार्दिक पटेल से देशद्रोह के मुकदमे वापस ले लिए गए हैं.
शहला राशिद जेएनयू की पूर्व छात्र नेता रही हैं और देश की राजनीति में नरेंद्र मोदी के उभार के दौरान उनके नीतियों, कार्यों की प्रखर आलोचक रही हैं. हालांकि पिछले कुछ सालों के दौरान उनके रुख में बदलाव आया है और अब वे केंद्र की नीतियों की सराहना करती हैं. खासकर जम्मू-कश्मीर से जुड़े फैसलों के संदर्भ में.
2015 में गुजरात के हिंसक पाटीदार आंदोलन के चेहरे रहे हार्दिक पटेल की राजनीति में 360 डिग्री का टर्न आया. हार्दिक पटेल ने जिस बीजेपी सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था. अब उसी बीजेपी के नेता बन गए हैं. हार्दिक पटेल अभी गुजरात के वीरगाम से बीजेपी के विधायक हैं.
आइए अब समझते हैं कि शहला राशिद और हार्दिक पटेल पर देशद्रोह के आरोप थे क्या, ये आरोप किस वजह से और कब लगे थे और इसे कैसे वापस लिया गया था.
शहला राशिद, JNU और विवाद
शहला राशिद का नाम देश की राजनीति में तब सुर्खियों में आया जब वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्र राजनीति में सक्रिय हुईं. वे 2015-16 में JNU छात्र संघ (JNUSU) की उपाध्यक्ष चुनी गईं थीं. इस दौरान शहला वामपंथी छात्र संगठन AISA की सदस्य थीं.

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