
'अविश्वास' पर उठा भरोसे का सवाल, प्रस्ताव पर हुड्डा के साइन नहीं दिखे तो CM सैनी बोले, 'कांग्रेस खुद कन्फ्यूज'
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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के हस्ताक्षर न होने का मुद्दा उठाया जिससे सदन में भरोसे और नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े हो गए. सीएम ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के भीतर भरोसे की कमी है. कांग्रेस ने आपत्ति जताई, लेकिन सीएम चर्चा के लिए तैयार हैं. इस विवाद के बीच सियासी पारा गरमाया और सदन में बहस का माहौल बना.
हरियाणा विधानसभा में शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव पर सियासी पारा अचानक चढ़ गया. सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक उस वक्त शुरू हुई, जब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के हस्ताक्षर न होने का मुद्दा उठा दिया. इसके बाद सदन में भरोसे, नेतृत्व और मंशा को लेकर सवालों की बौछार शुरू हो गई.
CM सैनी का दावा: नोटिस में नहीं दिखे विपक्ष के नेता के साइन
सीएम नायब सिंह सैनी ने सदन में कहा कि उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को बेहद ध्यान से पढ़ा, लेकिन उसमें कहीं भी विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के हस्ताक्षर नहीं मिले. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने अपनी ऐनक साफ कर दोबारा भी देखा, लेकिन साइन फिर भी नजर नहीं आए.
‘मैं हुड्डा को नेता मानता हूं, मगर कांग्रेस शायद नहीं’
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह भूपेंद्र सिंह हुड्डा को विपक्ष का नेता मानते हैं और यह बात वह सदन में पहले भी कह चुके हैं. लेकिन जिस तरह से नोटिस पर उनके साइन नहीं हैं, उससे यही लगता है कि कांग्रेस पार्टी के भीतर ही उन पर भरोसे की कमी है.
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