
पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को कोर्ट से झटका, न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई
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प्रवर्तन निदेशालय ने पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को जुलाई में गिरफ्तार किया था. गंभीर आरोपों में घिरे पार्थ चटर्जी को ममता बनर्जी ने मंत्री पद से हटा दिया था. इससे पहले अर्पिता मुखर्जी के घर से ईडी को करीब 50 करोड़ कैश मिला था. जो शिक्षा विभाग के लिफाफों में रखे भी रखे थे. वहीं पूछताछ में अर्पिता ने इन पैसों पर पार्थ चटर्जी का बताया था.
पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में जेल में बंद पूर्व शिक्षा मंत्री और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी को एक बार फिर कोर्ट से झटका लगा है. कारण, कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई करते हुए दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी. दोनों को वर्चुअल मोड पर कोर्ट में पेश किया गया था. याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने दोनों की न्यायिक हिरासत 14 दिनों के लिए बढ़ा दी है.
दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय ने दोनों को जुलाई में गिरफ्तार किया था. गंभीर आरोपों में घिरे पार्थ चटर्जी को ममता बनर्जी ने मंत्री पद से हटा दिया था. इससे पहले अर्पिता मुखर्जी के घर से ईडी को करीब 50 करोड़ कैश मिला था. जो शिक्षा विभाग के लिफाफों में रखे भी रखे थे. वहीं पूछताछ में अर्पिता ने इन पैसों पर पार्थ चटर्जी का बताया था.
यह देखते हुए कि आरोपियों और अन्य संबंधित गवाहों से पूछताछ के साथ ही मामले में कई अहम जानकारी मिल रही है, कोर्ट ने ईडी की उस प्रार्थना को भी स्वीकार कर लिया जिसमें चटर्जी और मुखर्जी से जेल में पूछताछ के लिए अनुमति मांगी गई थी. दोनों की हिरासत बढ़ाने की मांग करते हुए ईडी के वकीलों ने कहा कि जांच के दौरान यह जानकारी मिलने पर 100 से अधिक बैंक खातों में लेन-देन की भी जांच की जा रही है. जिनमें आपराधिक गतिविधियों से मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है.
यह कहते हुए कि पूर्व मंत्री 113 दिनों से हिरासत में हैं, उनके वकीलों ने दावा किया कि उन्हें और जेल में रखने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि केस को खत्म होने में लंबा समय लग सकता है. मुखर्जी के वकील ने भी न्यायिक हिरासत बढ़ाने की प्रार्थना का विरोध करते हुए कई दलीलें दीं.
2014 में घोटाले के वक्त शिक्षा मंत्री थे पार्थ
बता दें कि 2014 जब शिक्षा भर्ती घोटाला हुआ था, उस पार्थ चटर्जी के पास ही शिक्षा विभाग था. उन पर मोटी रकम लेकर अयोग्य लोगों की भर्ती का आरोप है. आरोप है कि वह अर्पिता के नाम पर फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों का हेरफेर कर रहे थे. इस मामले की जांच में ईडी और सीबीआई को कई अहम सबूत मिले हैं, जो सीधे पार्थ चटर्जी को घेरते नजर आ रहे हैं.

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