
‘पथराव का आरोप बेबुनियाद...', पुलिस ने खारिज किए विजय की पार्टी के दावे, कहा- हमारी बात मानते तो भगदड़ न होती
AajTak
तमिलनाडु पुलिस ने विजय की करूर रैली में जुटी भीड़ पर पथराव होने के टीवीके के आरोपों को खारिज कर दिया है. पुलिस ने कहा कि वहां कोई पथराव नहीं हुआ, विजय की पार्टी ने हमारे आदेशों का उल्लंघन करके रैली का आयोजन किया.
तमिलनाडु पुलिस ने टीवीके चीफ विजय की करूर रैली में मची भगदड़ के पीछे साजिश के आरोपों को खारिज कर दिया है. राज्य पुलिस ने कहा कि तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के नेतृत्व ने करूर रैली में आधिकारिक दिशानिर्देशों की अवहेलना की, जिसमें शनिवार को भगदड़ मचने से 40 लोगों की मौत हो गई थी. पुलिस ने कहा कि विजय की पार्टी ने जगह कम होने के बावजूद भारी भीड़ इकट्ठा की.
तमिलनाडु पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) डेविडसन देवसिरवथम ने तमिलगा वेत्री कझगम के इस दावे का खंडन किया कि पथराव के कारण भगदड़ मची थी, और स्पष्ट किया कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी. एडीजीपी डेविडसन ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, 'करूर रैली में विजय के आने में देरी हुई. नमक्कल, जहां विजय की एक और रैली होनी थी, वहां से भी लोग करूर में जमा हो गए. इस कारण भारी भीड़ जमा हो गई, जिसे नियंत्रित करना मुश्किल हो गया.'
यह भी पढ़ें: भीड़ पर पथराव और पुलिस का लाठीचार्ज... विजय की पार्टी ने भगदड़ को लेकर जताई 'साजिश' की आशंका
TVK ने 12000 की भीड़ के लिए ली थी परमिशन
एडीजीपी ने आगे बताया कि विजय की पार्टी ने 12,000 लोगों के जमावड़े के लिए पुलिस से अनुमति मांगी गई थी, और उसके अनुसार ही पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, 'नमक्कल रैली में देरी होने के कारण, वह (विजय) शाम 6 बजे करूर पहुंच पाए. भीड़ तेजी से बढ़ने लगी, नमक्कल और करूर, दोनों जगहों से लोग उन्हें देखने के लिए इकट्ठा हो गए... हर कोई विजय को देखना चाहता था और भीड़ उनकी गाड़ी की ओर बढ़ रही थी. रैली में जुटे लोग किसी की भी बात सुनने को तैयार नहीं थे, यहां तक कि वालंटियर्स, बाउंसर्स या फिर जिन्हें भी वे अपने साथ लाए थे, उनकी भी नहीं.'
यह भी पढ़ें: कभी एंबुलेंस के लिए रास्ता मांगते, कभी पानी की बोतलें फेंकते... भारी भीड़ के बीच चिल्लाते रहे विजय

यूपी में जल जीवन मिशन में लापरवाही पर सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है. 12 जिलों के 26 इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 12 को निलंबित किया गया, जबकि अन्य पर जांच, नोटिस और तबादले की कार्रवाई हुई है. खराब गुणवत्ता, धीमी प्रगति और शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया. सरकार ने स्पष्ट किया है कि हर घर नल योजना में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

कड़क है नॉर्थ बंगाल की चुनावी चाय! 54 सीटों में छुपा सत्ता का स्वाद, स्विंग वोटर्स करेंगे असली फैसला
उत्तर बंगाल की 54 सीटें पश्चिम बंगाल की सत्ता की चाबी मानी जाती हैं, जहां चुनावी ‘चाय’ का स्वाद हर बार बदलता है. टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर में यह इलाका स्विंग जोन की भूमिका निभाता है. चाय बागान, पहाड़ी राजनीति, आदिवासी और राजवंशी वोटबैंक जैसे कई फैक्टर नतीजों को प्रभावित करते हैं. छोटे वोट शिफ्ट भी यहां बड़ा असर डाल सकते हैं, जिससे तय होगा कि राज्य की सत्ता किसके हाथ जाएगी.

मर तो वो 13 साल पहले गया था लेकिन मौत सचमुच तब उसके हिससे में आई जब इस चिता में लेटने के बाद जब हरीश की आत्मा की लाइट यानी रोशनी चिता से उठती इस आग के साथ मिलकर हमेशा-हमेशा के लिए ये दुनिया छोड़ गई. पर इस दुनिया को छोड़ने से पहले हरीश आजादा भारत के इतिहास का पहला भारतीय बन गया जिसे अदालत और अस्पताल ने मिलकर मां-बाप की इच्छा को ध्यान में रखते हुए इच्छामृत्यु दी.










