
नीतीश, बीजेपी से तेजस्वी तक... बिहार में लाडली बहन पॉलिटिक्स पर क्यों हर दल ने झोंकी ताकत?
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महिलाओं के लिए डायरेक्ट कैश बेनिफिट चुनाव विजयी फॉर्मूला बनकर उभरा है. बिहार में विपक्षी आरजेडी ने यह दांव चल भी दिया है. सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, हर कोई महिला मतदाताओं को लुभाने, अपने पाले में लाने की कोशिश में जुटा है. लेकिन नीतीश कुमार के कोर वोटबैंक में सेंध आसान नहीं है. क्यों?
पिछले कुछ चुनावों से लाडली बहना पॉलिटिक्स राजनीतिक दलों के लिए चुनावी जीत की गारंटी बन गया है. मध्य प्रदेश हो या महाराष्ट्र या फिर झारखंड, इन राज्यों में महिलाओं को दिया गया डायरेक्ट कैश बेनिफिट सत्ताधारी दलों के लिए सरकार बनाने का वरदान साबित हुआ. वहीं, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली के चुनाव में कैश बेनिफिट का वादा जीत की कुंजी बन गया. अब हिंदी पट्टी का एक महत्वपूर्ण राज्य बिहार विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़ा है. बिहार चुनाव के दिन जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, लाडली बहन पॉलिटिक्स को लेकर चर्चा तेज होती जा रही है.
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद का अघोषित चेहरा माने जा रहे तेजस्वी यादव सत्ता में आने पर माई-बहिन मान योजना लाकर महिलाओं के खाते में हर महीने 2500 रुपये भेजने का वादा कर चुके हैं. तेजस्वी के इस दांव को काउंटर करने के लिए 'लाड़ला मुख्यमंत्री' नीतीश कुमार की सरकार के भी जुलाई तक ऐसी कोई योजना लागू करने की चर्चा है. हालांकि, सरकार या सत्ताधारी गठबंधन में शामिल किसी दल की ओर से इसे लेकर कोई ऐलान नहीं किया गया है. सवाल उठ रहा है कि बिहार चुनाव से पहले सूबे में लाडली बहन पॉलिटिक्स की चर्चा क्यों हो रही है?
बिहार में लाडली पॉलिटिक्स की चर्चा क्यों
बिहार में लाडली पॉलिटिक्स की चर्चा के पीछे महिला मतदाताओं की तादाद और वोटिंग पैटर्न भी वजह है. 1 जनवरी 2025 को आधार मानकर चुनाव आयोग की ओर से जारी की गई मतदाता सूची में कुल मतदाताओं की तादाद बढ़कर 7 करोड़ 80 लाख पहुंच गई है. महिला मतदाताओं की संख्या भी 3 करोड़ 72 लाख के करीब है. पिछले कुछ चुनावों का वोटिंग पैटर्न देखें तो महिला मतदाता वोट डालने के लिए पुरुषों के मुकाबले अधिक संख्या में घर से निकली हैं. महिलाओं वोटर्स का टर्नआउट पुरुषों के मुकाबले अधिक रहा है.
पिछले तीन चुनावों से महिला वोटर्स का टर्नआउट अधिक
बिहार विधानसभा के पिछले तीन चुनावों से महिला मतदाताओं का टर्नआउट पुरुषों के मुकाबले अधिक रहा है. साल 2010 के बिहार चुनाव में ऐसा पहली बार हुआ था जब किसी राज्य के विधानसभा चुनाव में वोट डालने के मामले में महिलाएं आगे रही थीं. तब पुरुषों का टर्नआउट 53 और महिलाओं का 54.5 फीसदी रहा था. इस चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी को 115 सीटें मिली थीं. 2015 में 51.1 फीसदी पुरुषों के मुकाबले 60.4 फीसदी महिलाओं ने मतदान किया था. 2020 के बिहार चुनाव में जहां 54.6 फीसदी पुरुषों ने वोट किए थे. इस चुनाव में भी 59.7 फीसदी महिलाओं ने वोट किया था, जो पुरुषों के मुकाबले 5 फीसदी अधिक है.

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