
नीतीश बनाम BJP... साढ़े चार साल की दोस्ती के बाद क्यों खिंची बिहार NDA में तलवार? बिगड़ न जाए नंबर गेम!
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बिहार में बीजेपी और जेडीयू के बीच लगता है कि सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. विधानसभा में नीतीश कुमार के तेवर से साफ है कि वो तीन नंबर की पार्टी है, लेकिन सरकार के कामकाज में किसी का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे. ऐसे में बीजेपी और जेडीयू के बीच आर-पार के मूड में दिख रही है.
बिहार विधानसभा अध्यक्ष के साथ हुई बदसलूकी का मामला सियासी तौर पर तूल पकड़ने लगा है. बीजेपी और जेडीयू के बीच तकरार बढ़ती जा रही है और अब दोनों आर-पार के मूड में दिख रही हैं. विधानसभा में गुस्से में तमतमाए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्पीकर को संविधान देखने की नसीहत तक दे डाली, जिसके बाद विजय सिन्हा मंगलवार को सदन में नहीं पहुंचे. ऐसे में सवाल उठता है कि साढ़े चार साल के बाद क्या फिर जेडीयू और बीजेपी की दोस्ती में दरार आएगा?
बिहार के लखीसराय के पुलिस उपाधीक्षक व थाना प्रभारी के खिलाफ जांच को लेकर जेडीयू और बीजेपी के बीच तलवार खिंच गई है. बिहार की राजनीति में बीजेपी और जेडीयू के बीच यह नाक की लड़ाई बन गई. पूरे प्रकरण के बाद सीएम नीतीश ने तत्काल हाईलेवल बैठक बुलाकर साफ कर दिया कि वह इस तरह की बातें बर्दाश्त नहीं करेंगे.
वहीं, वीआईपी अध्यक्ष मुकेश सहनी सीएम नीतीश कुमार के पक्ष में खड़े दिख रहे हैं जबकि बीजेपी भी आक्रमक मूड में उतर गई. बीजेपी एक तरफ मुकेश सहनी की कैबिनेट से छुट्टी कराना चाहती है तो दूसरी तरफ जेडीयू के साथ भी रिश्ते बिगड़ रहे हैं. ऐसे में बिहार विधानसभा का नंबर गेम क्या है?
बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटें है, जिनमें से फिलहाल 242 सदस्य है और एक सीट रिक्त है. इस तरह बहुमते लिए कम से कम 122 विधायकों का आंकड़ा चाहिए.
एनडीए को 127 विधायकों का समर्थन
बीजेपी के 74 विधायक जेडीयू के 45 विधायक HAM के 4 विधायक VIP के 3 विधायक निर्दलीय एक विधायक

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