
'निर्भया जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन...,' मणिपुर पर SC में सुनवाई के दौरान CJI की सख्त टिप्पणी
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सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने सोमवार को मणिपुर में महिलाओं के साथ दरिंदगी के मामले में सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणियां कीं. इस दौरान उन्होंने इस मामले में पुलिस की लारवाही पर सवाल उठाए. इसके अलावा उन्होंने केंद्र और राज्य सरकरों की कार्यवही पर भी फटकार लगाई. साथ ही कोर्ट ने मामले में एसआईटी जांच कराने से भी इनकार कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को मणिपुर में दो महिलाओं को नग्न कर उनकी परेड कराने के मामले में सुनवाई हुई. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकारों के रवैये पर नाराजगी जताई. उन्होंने पुलिस की लापरवाही पर सख्त टिप्पणी की. साथ ही वकीलों की दलीलों पर गंभीर टिप्पणियों भी कीं. उन्होंने महिलाओं से हुई हैवानियत को अभूतपूर्व करार दिया. इसके अलावा उन्होंने पश्चिम बंगाल, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और केरल जैसे राज्यों में भी मणिपुर जैसी कथित घटनाओं को लेकर दायर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मणिपुर हिंसा की जांच के लिए एसआईटी नहीं करेगी.
सीजेआई ने कहा-‘मणिपुर में सांप्रदायिक और जातीय हिंसा की स्थिति है, इसलिए हम जो कह रहे हैं वह यह है कि इसमें कोई दो राय नहीं कि पश्चिम बंगाल में भी महिलाओं के खिलाफ अपराध हो रहे हैं. वर्तमान में वह मणिपुर से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे हैं. मणिपुर में महिलाओं के खिलाफ होने वाली अपराधिक घटनाओं की तुलना देश के अन्य हिस्सों में इसी तरह की घटनाओं से नहीं की जा सकती.
मणिपुर में हिंसा के दौरान लूटे गए 4600 हथियार, 3400 अभी भी रिकवर नहीं हुए
- '... इस बात का हवाला देकर पल्ला नहीं झाड़ सकते हैं कि देश के बाकी राज्यों में भी महिलाओं के खिलाफ अपराध हो रहे हैं. हम पश्चिम बंगाल या किसी दूसरे सूबे में हुई वारदात को इससे नहीं जोड़ सकते. मणिपुर में जो कुछ हुआ वो मानवता को शर्मसार करने वाला है. हमारा दायित्व है कि उन दोनों महिलाओं को न्याय मिलना चाहिए. हम मणिपुर में जीवन को सामान्य बनाने की आवश्यकता के बारे में भी परेशान हैं.'
- 'हमारे हाथ से समय निकल रहा है. राज्य को मरहम लगाने वाले कदम उठाने की जरूरत है. इस मामले को तीन महीने बीत गए. इसका मतलब है कि सबूत नष्ट किए जा रहे हैं. मैंने अखबार में पढ़ा कि दो चश्मदीदों गवाहों की हत्या कर दी गई.' '...ऐसे कई मामले हैं, जो मीडिया में हैं, पब्लिक को भी पता है, लेकिन सरकार को इसकी जानकारी कैसे नहीं है. पीड़ितों के बयान हैं कि पुलिस ने उन्हें भीड़ को सौंपा था, यह काफी भयावह है. यह निर्भया जैसी स्थिति नहीं है, जिसमें एक बलात्कार हुआ था, वो भी काफी भयावह था लेकिन इससे अलग था. यहां हम सिस्टेमैटिक हिंसा से निपट रहे हैं जिसे भारतीय दंड संहिता अपराध मानता है.'
- 'क्या आप (वकील बांसुरी स्वराज) यह कह रही हैं कि भारत की सभी बेटियों के लिए कुछ करें या किसी के लिए कुछ भी न करें? पूरे देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध होते हैं. यह हमारी सामाजिक वास्तविकता का हिस्सा है. वर्तमान में हम ऐसी किसी चीज से निपट रहे हैं, जो अभूतपूर्व है.'

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