
निठारी कांड में 20 साल बाद बड़ा फैसला, सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को आखिरी केस में भी किया बरी
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सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड में मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली को आखिरी केस में भी बरी कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि निठारी में अपराध जघन्य थे और पीड़ित परिवारों का दुःख माप से परे है. पर ये अफसोस की बात है कि लंबी जांच के बावजूद, वास्तविक अपराधी की पहचान कानूनी मानदंडों को पूरा करने वाले तरीके से स्थापित नहीं हो पाई है.
नोएडा के निठारी में गायब बच्चों के मानव अवशेष मिलने के 20 साल बाद, मामले के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली को आखिरी FIR में भी बरी कर दिया गया है. मोहिंदर सिंह पंढेर के घर (डी5, सेक्टर 31, नोएडा) में काम करने वाले सुरेंद्र कोली को सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव याचिका स्वीकार करते हुए बरी किया है. CJI बीआर गवई, जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने अपने फैसले में 2006 से जेल में बंद कोली को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने केस की ख़राब जांच पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य फॉरेंसिक सबूतों से सिद्ध नहीं हुए हैं. कोर्ट ने कहा कि एक घरेलू सहायक बिना किसी मेडिकल ट्रेनिंग के शरीर के टुकड़ों को साफ और वैज्ञानिक तरीके से कैसे काट सकता था.
सुरेंद्र कोली को इसी हत्याकांड से जुड़े 12 अन्य मामलों में पहले ही बरी किया जा चुका है. यह फैसला 14 साल के रिम्पा हल्दर के रेप और हत्या मामले से संबंधित है. सुप्रीम कोर्ट ने कोली के जुड़े इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले से सहमति जताई है, जिसमें बरी किया गया था.
दोषपूर्ण पुलिस जांच पर गंभीर सवाल...
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस जांच में दोषों को लेकर तीखी आलोचना की है. अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड-आधारित कमियां न्याय और विश्वसनीयता पर सीधा असर डालती हैं. कोर्ट ने कहा कि जांच पेशेवर और संवैधानिक रूप से अनुरूप नहीं थी. समय पर और पेशेवर जांच के अभाव ने सच्चे अपराधी की पहचान के रास्ते बंद कर दिए.
SC ने कोली के 'कबूलनामे' पर भरोसा करने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने ध्यान दिया कि कोली 60 दिनों से ज्यादा वक्त तक पुलिस हिरासत में रहा और उसे कानूनी सहायता या यहां तक कि चिकित्सीय जांच भी उपलब्ध नहीं कराई गई.

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