
ना ना करते केजरीवाल ही जाएंगे राज्यसभा, क्योंकि उनका ट्रैक रिकॉर्ड यही कहता है
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अरविंद केजरीवाल राज्यसभा जाने से इनकार ही इकरार का इशारा करता है. संजीव अरोड़ा के चुनाव जीत जाने से ये केजरीवाल के राज्यसभा जाने का रास्ता ही साफ नहीं हुआ है, उनका जाना भी पक्का लगता है - और केजरीवाल की राजनीति का ट्रैक रिकॉर्ड ही सबसे बड़ा सबूत है.
अरविंद केजरीवाल का ये कहना कि वो राज्यसभा नहीं जा रहे हैं, महज राजनीतिक बयान है. और, ये कोई पहला वाकया नहीं है. लगे हाथ अरविंद केजरीवाल ने ये भी कहा है कि आम आदमी पार्टी की PAC यानी पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी जिसे भेजना चाहेगी, वो जाएगा.
बिल्कुल सही बात है. पीएसी, आम आदमी पार्टी की सबसे ताकतवर निर्णायक समिति है, जिसका फैसला मानने के लिए अरविंद केजरीवाल भी बाध्य हैं. सवाल है कि जब पीएसी के सदस्यों ने एक बार तय कर लिया कि अरविंद केजरीवाल को ही भेजना है, तो वो भी क्या कर पाएंगे?
चलिये, फिलहाल अरविंद केजरीवाल की बात मान लेते हैं. लेकिन, ये बात भी वैसे ही मानना पड़ेगा जैसे उनके पहले वाली बातें. मसलन, अरविंद केजरीवाल का सुरक्षा लेने से इनकार कर देना. बंगला लेने से इनकार कर देना. वीआईपी कल्चर को नापसंद करना - और बाद में धीरे धीरे वो सब अपना लेना, जिससे पहले इनकार कर चुके हों.
अरविंद केजरीवाल का ट्रैक रिकॉर्ड तो यही कहता है कि जो वो कहते हैं, उसे तो करने की कोशिश करते ही हैं. और, जिस बात से इनकार करते हों, उसे तो पक्के तौर पर कर ही डालते हैं - और इस हिसाब से अरविंद केजरीवाल के राज्यसभा जाने की योजना भी समझी जा सकती है.
संजीव अरोड़ा को विधानसभा भेजना ही क्यों था?
मान लीजिये अरविंद केजरीवाल को राज्यसभा नहीं जाना था, फिर संजीव अरोड़ा को लुधियाना उपचुनाव में उम्मीदवार बनाने की जरूरत ही क्या थी? लुधियाना के लिए तो पहले से ही आम आदमी पार्टी में कई दावेदार थे. लुधियाना उपचुनाव में जैसी मेहनत की गई है, किसी के लिए भी की जा सकती थी. और, ऐसे नतीजे भी लाये जा सकते थे.

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