
नए CEC की नियुक्ति से सहमत नहीं थे राहुल गांधी, PM मोदी-अमित शाह के सामने दिया ये कारण
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कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि हमें इस बात की पूरी उम्मीद थी कि पीएम मोदी की अध्यक्षता वाला चयन पैनल विपक्ष के नेता की मांग/आपत्ति को नजरअंदाज करके आगे बढ़ेगा और सीईसी के रूप में अपनी पसंद के उम्मीदवार का चयन करेगा.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सोमवार को भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन करने वाली तीन सदस्यीय सेलेक्शन कमेटी की बैठक में शामिल हुए. इस कमेटी की अध्यक्षता पीएम मोदी ने की और इसमें तीसरे सदस्य केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह थे. पीएम मोदी और अमित शाह के साथ बैठक के दौरान राहुल गांधी ने नए मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति तब तक टालने की मांग की, जब तक कि चयन समिति से सीजेआई की अनुपस्थिति पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट अंतिम फैसला नहीं ले लेता.
बता दें कि केंद्र सरकार ने पिछले साल संसद से एक कानून पारित करके मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करने वाले पैनल से भारत के मुख्य न्यायधीश को बाहर रखा था. नए कानून के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाले पैनल में तीन सदस्य होंगे. पैनल की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करेंगे, लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष और पीएम द्वारा नामित कैबिनेट मंत्री पैनल के अन्य दो सदस्य होंगे. साउथ ब्लॉक में हुई इस बैठक के कुछ ही देर बाद कानून मंत्रालय ने एक गजट नोटिफिकेशन जारी करके बताया कि राष्ट्रपति ने 1988 बैच के आईएएस ज्ञानेश कुमार को भारत का नया मुख्य चुनाव आयुक्त और 1989 बैच के आईएएस विवेक जोशी को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया है.
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राहुल गांधी ने CEC की नियुक्ति पर जताई असहमति
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक बयान में कहा- पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति की बैठक में राहुल गांधी ने नए सीईसी की नियुक्ति पर अपनी असहमति जताई. उन्होंने कहा कि यह नियुक्ति सेलेक्शन पैनल की स्वतंत्रता और तटस्थता को प्रभावित करने वाले शीर्ष अदालत के आदेश की भावना के खिलाफ है. राहुल गांधी ने अपनी असहमति एक नोट के रूप में पैनल के समक्ष रखा. कांग्रेस की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति वाले पैनल से सीजेआई को बाहर रखने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 19 फरवरी को सुनवाई करने वाला है. इसलिए नए सीईसी का चयन करने के लिए होने वाली बैठक शीर्ष अदालत का फैसला आने के बाद हो सकती थी. अगर सरकार चाहती तो वह मामले की सुनवाई और निर्णय शीघ्रता से करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक आवेदन दे सकती थी.
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