
दो चुनाव, 11 में 0 का स्कोर... बीजेपी से ज्यादा आरएलडी को है नए गठबंधन की जरूरत, समझें पश्चिमी यूपी का गणित
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लोकसभा चुनाव से पहले इंडिया ब्लॉक को एक और बड़ा झटका लग सकता है. यूपी में जयंत चौधरी की पार्टी RLD विपक्षी दलों के गठबंधन से अलग हो सकती है. कहा जा रहा है कि जयंत बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा बन सकते हैं. हालांकि, जयंत लगातार 'इंडिया' ब्लॉक के साथ होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जानकार कहते हैं कि जयंत ने अपने दरवाजे दोनों तरफ खोल रखे हैं. जयंत जल्द अपने पत्ते खोल सकते हैं.
आम चुनाव करीब हैं और बीजेपी की चुनावी रणनीतियां लगातार चौंका रही हैं. पहले बिहार में महागठबंधन में सेंधमारी की और अब यूपी में बड़ी तोड़फोड़ की तैयारी है. खबर है कि राष्ट्रीय लोकदल (RLD) प्रमुख जयंत चौधरी से अलायंस को लेकर बातचीत अंतिम दौर में है. यानी आरएलडी जल्द ही एनडीए का हिस्सा बन सकती है. अगर यह संभव होता है तो इसे बीजेपी की बड़ी रणनीतिक जीत माना जाएगा. क्योंकि आरएलडी अब तक INDIA ब्लॉक का हिस्सा है और कुछ दिन पहले ही सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जयंत के साथ सीट शेयरिंग का ऐलान किया था. सवाल उठ रहा है कि आखिर वो क्या वजह है कि आरएलडी यूपी में INDIA ब्लॉक और एनडीए के लिए क्यों इतनी जरूरी है या दोनों की कोई मजबूरी है?
पश्चिमी यूपी को जाट और मुस्लिम बाहुल्य इलाका माना जाता है. यहां लोकसभा की कुल 27 सीटें हैं और 2019 के चुनाव में बीजेपी ने 19 सीटों पर जीत हासिल की थी. जबकि 8 सीटों पर महागठबंधन ने कब्जा किया था. इनमें 4 सपा और 4 बसपा के खाते में आई थी. लेकिन, आरएलडी को किसी सीट पर जीत नसीब नहीं हुई थी. यहां तक कि जयंत को पश्चिमी यूपी में जाट समाज का भी साथ नहीं मिला था. यही नहीं, 2014 के चुनाव में भी जयंत को निराशा हाथ लगी थी और एक भी सीट नहीं मिली थी.
'लगातार दूसरी बार आम चुनाव में आरएलडी की हार'
2019 के आम चुनाव में जयंत चौधरी की पार्टी RLD ने सपा-बसपा के साथ गठबंधन में तीन सीटों पर चुनाव लड़ा था और तीनों सीटों पर दूसरे नंबर पर आई थी. जयंत चौधरी अपने पुश्तैनी क्षेत्र बागपत से चुनाव लड़े और बीजेपी के डॉ. सतपाल मलिक से 23 हजार वोटों से हार गए थे. मथुरा से आरएलडी के कुंवर नरेंद्र सिंह को हेमा मालिनी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. इसी तरह जाटों के लिए बेहद सुरक्षित मानी जाने वाली मुजफ्फरनगर सीट से अजित सिंह पहली बार चुनाव लड़े थे और बीजेपी के संजीव बालियान से 6500 से ज्यादा वोटों से हार गए थे. अजित और जयंत चौधरी को सपा-बसपा के अलावा कांग्रेस का भी समर्थन मिला था. यह लगातार दूसरा आम चुनाव था, जब चौधरी परिवार को खाली हाथ रहना पड़ा था.
25 साल-9 गठबंधन... हर चुनाव में नए सहयोगी संग नजर आती है RLD
2014 में आरएलडी का 0.9% था वोट शेयर

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