
दोस्ती, गैंगरेप और ब्लैकमेलिंग... दिल दहला देगी दरिंदगी का शिकार बनी इन दो महिलाओं की दर्दनाक कहानी
AajTak
बस में आते जाते तीन लड़कों से स्वाति की दोस्ती हो जाती है. फिर एक रोज़ मौका मिलते ही तीनों स्वाति के साथ दरिंदगी करते हैं. और इस दौरान मोबाइल पर उन पलों को रिकॉर्ड भी कर लेते हैं. ताकि स्वाति पुलिस या घरवालों से इस बारे में कुछ ना बता सके.
Rajasthan Gangrape & Suicide Case: ऊपर तस्वीर में एक ऐसी रेप पीड़िता है, कायदे से जिसका चेहरा छुपाने की जरूरत नहीं थी. लेकिन क्या करें? क़ानून आड़े आ रहा था. कानून भी अजीब है. रेप की शिकार लड़कियों और औरतों के चेहरे को छुपाता है. और रेप करने वालों को बचाता है. या फिर खुद ही उनके चेहरे छुपा देता है. ये तस्वीर राजस्थान की रहनेवाली 18 साल की आभा की है. जिसने कुछ रोज पहले अपने सामने मीडिया के तमाम माइक रख कर कानून के मुंह पर तमाचा मारा था. लेकिन अफसोस ना अब उसे कानून से कोई शिकायत है, ना पुलिस से नफरत. साथ ही कानून और पुलिस को भी अब डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आभा अब कभी नहीं बोलेगी. क्योंकि अब वो हमेशा-हमेशा के लिए खामोश हो चुकी है.
पुलिस थाने पर गांववालों का धरना तमाम मीडिया वालों को बुला कर अपनी आखिरी बात कहने के कुछ घंटे बाद ही आभा ने खुद अपनी जिंदगी खत्म कर ली. आभा के जीते जी उसकी जो बात किसी ने नहीं सुनी, लेकिन अब उसकी कहानी सामने आने पर हंगामा बरपा है. जो आभा जीते जी अपने और अपनी भाभी के लिए इंसाफ मांग रही थी. अब उसी लेटी हुई खामोश आभा को इंसाफ दिलाने के लिए उसकी अर्थी के साथ पूरा गांव इस वक्त एक पुलिस स्टेशन के बाहर बैठा है. आभा भले ही मर चुकी है, लेकिन मौत के बाद भी उसकी लाश के इर्द गिर्द से उठता शोर अब भी गूंगे बहरे कानून और इंसाफ को झकझोरने और जगाने की कोशिश कर रही है.
फिल्मी कहानी बनी हकीकत साल 2017 में एक फिल्म आई थी 'काबिल'. इस फिल्म के हीरो और हिरोईन यानी ऋतिक रोशन और यामी गौतम का किरदार नेत्रहीन था. फिल्म में एक कॉर्पोरेटर का बेटा यामी के किरदार का रेप करता है. ऋतिक और यामी थाने जाकर रिपोर्ट लिखाते हैं. लेकिन पुलिस कुछ नहीं करती. इसके बाद हौसला बढ़ता है तो कॉर्पोरेटर का बेटा दोबारा यामी के घर में घुस कर उसका रेप करता है. अब कानून और सिस्टम से हार चुकी यामी की किरदार खुदकुशी कर लेती है.
दो मौत और सिस्टम की नाकामी बस यूं समझ लीजिए कि आभा की कहानी इससे कुछ अलग नहीं है. बस, फर्क इतना है कि इस कहानी में कानून अंधा निकला. और इसी अंधे कानून की वजह से दो लोगों को खुदकुशी करनी पड़ी. जी हां, आभा से पहले उसकी भाभी स्वाति को भी जब कानून और पुलिस से उसके सुलगते सवालों के जवाब नहीं मिले, तो वो खुद ही जिंदा आग में जल उठी. ये कहानी सिर्फ दो मौत की कहानी नहीं है, बल्कि ये खाकी, खादी, कानून, इंसाफ, सिस्टम हरेक के मुंह पर एक झन्नाटेदार थप्पड़ है. तो चलिए जीते जी आभा की, जिस कहानी को उसकी तमाम कोशिशों के बावजूद कोई नहीं सुन पाया, आज हम सब सुनते हैं.
आभा ने मीडिया को सुनाई थी आपबीती बात सिर्फ दो दिन पहले तीन अप्रैल की सुबह की है. राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ इलाक़े में आज तक के संवाददाता हरनेक सिंह को एक फोन आता है. फोन आभा नाम की लड़की ने किया था. उसने गुजारिश करते हुए कहा कि उसे मीडिया के जरिए कुछ कहना है. हरनेक सिंह तीन और चैनल के रिपोर्टर के साथ आभा के घर पहुंच जाते हैं. वहां आभा अपनी कहानी सुनाती है.
मंत्री के रिश्तेदार समेत तीन युवकों ने लूटी अस्मत इस कहानी की शुरुआत साल भर पहले होती है. आभा की भाभी स्वाति कॉलेज में पढ़ रही थी. घर से कॉलेज वो बस से जाया करती थी. उसी बस में तीन और लड़के अपने कॉलेज जाया करते थे. इन लड़कों के नाम हैं अशोक, लालचंद और श्योचंद. इनमें से श्योचंद राजस्थान के कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा का रिश्तेदार है. बस में आते जाते तीनों लड़कों से स्वाति की दोस्ती हो जाती है. फिर एक रोज़ मौका मिलते ही तीनों स्वाति के साथ जबरदस्ती करते हैं. और इस दौरान मोबाइल पर उन पलों को रिकॉर्ड भी कर लेते हैं. ताकि स्वाति पुलिस या घरवालों से इस बारे में कुछ ना कहे.

महायुद्ध के 19 दिन हो चुके हैं. मैं इस वक्त इजरायल के तेल अवीव में हूं. आज की रात महायुद्ध में बहुत गंभीर हो सकती है. क्योंकि महायुद्ध अब बेकाबू होने के मोड़ पर पहुंच सकता है. हमारा मकसद डराना नहीं है. ध्यान से इस बात को कहने की वजह समझिएगा. अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान की जंग में एक दूसरे पर ताबड़तोड़ वार-पलटवार हो रहे हैं. ताजा खबर ये है कि इजरायल ने ईरान की सबसे बड़े गैस ठिकाने पर हमला किया है. इजरायल ने ये हमला अमेरिका की मदद से किया है. जो दक्षिण पश्चिम ईरान में है.

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की NSA अजित डोभाल संग बैठक, डिफेंस-इंटेलिजेंस समेत कई मुद्दों पर हुई बात
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के साथ बैठक की, जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा हुई. दोनों देशों ने डिफेंस, इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी में साझेदारी मजबूत करने पर जोर दिया.

ईरान अपने सुरक्षा प्रमुख की मौत के शोक में डूबा हुआ है और इंतकाम की कसमें खा रहा है. उधर इजरायल और अमेरिका इस उम्मीद में हैं कि उसने ईरान के तमाम बड़े नेता, कमांडर और प्रमुख मार दिए हैं, तो अब ईरान सरेंडर करेगा. लेकिन ईरान सरेंडर के मोड में नहीं है. इस बीच दुनिया हैरान है कि जब इजरायल और अमेरिका इतने हमले कर रहा है तो ईरान के सुरक्षा प्रमुख खुद को सुरक्षित क्यों नहीं रख पाए. इजरायल ने कैसे अली लारीजानी को मारा.

जैसे जैसे अमेरिका, इजरायल और ईरान का युद्ध आगे बढ़ रहा है वैसे वैसे तबाही की तस्वीरें सामने आ रही हैं, एक तरफ अमेरिका और इजरायल ईरान को निशाना बना रहे हैं उनके शहरों में धमाके कर रहे हैं. दूसरी ओर ईरान भी पलटवार कर रहा है. लेकिन आज सुबह इजरायली हमले के बाद बेरूत का रिहायशी इलाका कब्रगाह में बदल गया और चीख पुकार मचने लगी, इजरायल ने बेरूत में 22 मंजिला इमारत को निशाना बनाया गया.

दिल्ली-एनसीआर में पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम अचानक बदल गया है. ठंडी हवाएं, बादल और हल्की बारिश से तापमान में गिरावट आई है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक हल्की बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का अनुमान जताया है. गुरुवार और शुक्रवार के लिए येलो अलर्ट जारी है. तापमान 27 से 31 डिग्री के बीच रह सकता है और 21 मार्च के बाद मौसम धीरे-धीरे साफ होगा.

16 मार्च को वाराणसी में गंगा में नाव पर इफ्तार पार्टी मनाना कुछ मुस्लिम युवकों को महंगा पड़ गया. बीजेपी और हिंदूवादी संगठन का आरोप है कि, इन लोगों ने रोजा इफ्तार पार्टी करने के बाद गंगा नदी में बिरयानी और हड्डियां फेंक दीं. जैसे ही स्थानीय बीजेपी नेता की ओर से इन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई, पुलिस हरकत में आई और आनन फानन में 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. अब संत समाज और बीजेपी इसे हिंदुओं के खिलाफ सोची समझी साजिश करार दे रहे हैं तो विपक्ष पूछ रहा है कि, गंगा में इफ्तार पार्टी करने से कौन सा कानून तोड़ा गया जो पुलिस ने इन लोगों को गिरफ्तार कर लिया. सवाल है कि, ये कौन लोग हैं जिन्हें यूपी की अमन शांति रास नहीं आ रही.

जेडीयू नेता केसी त्यागी ने पार्टी की सदस्यता का नवीनीकरण न कराकर अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट कर दिया है. उनके इस कदम को बिहार की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है. साथ ही, पार्टी के भीतर नई पीढ़ी के उभार और पुराने नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं.






