
दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को AAP ने बताया 'विक्ट्री', सदन में हंगामे को लेकर कही ये बात
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AAP विधायक आतिशी का कहना है कि भाजपा की मांग थी कि हाई कोर्ट उसके पक्ष में असंवैधानिक नतीजों की घोषणा करे, लेकिन कोर्ट ने भाजपा की बात मानने से इनकार कर दिया. अब हाई कोर्ट मेयर और एमसीडी अधिकारियों की पावर का परीक्षण करने के बाद अपना फैसला सुनाएगा.
दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को AAP ने 'विक्ट्री' बताते हुए कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने भाजपा के पक्ष में स्थायी समिति के चुनाव परिणाम की घोषणा करने से इनकार कर दिया है. AAP का कहना है कि भाजपा की मांग थी कि हाई कोर्ट उसके पक्ष में असंवैधानिक नतीजों की घोषणा करे, लेकिन कोर्ट ने भाजपा की बात मानने से इनकार कर दिया. अब हाई कोर्ट मेयर और एमसीडी अधिकारियों की पावर का परीक्षण करने के बाद अपना फैसला सुनाएगा.
आम आदमी पार्टी की विधायक आतिशी ने कहा कि हमें खुशी है कि भाजपा ने संविधान व काननू का सम्मान करने का फैसला लिया है. अभी तक भाजपा सिर्फ गुंडादर्गी और मारपीट कर रही थी. मेयर ने साफ किया था कि भाजपा पार्षदों ने बैलेट पेपर और काउंटिंग शीट फाड़ दी है और अब उनके पास परिणाण घोषित करने का कोई आधार नहीं बचा है.
HC का फैसला AAP की जीत
इसके आगे आतिशी ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले पर हमें बहुत खुशी है. यह आम आदमी पार्टी और हमारी मेयर डॉ. शैली ओबरॉय के फैसले की जीत है. भारतीय जनता पार्टी चाहती थी कि हाई कोर्ट स्थायी समिति चुनाव की गिनती के अवैध फैसले का समर्थन करे और गैर-कानूनी और असंवैधानिक नतीजों की घोषणा करे, लेकिन हाई कोर्ट ने भाजपा की गैर-कानूनी और असंवैधानिक मांग को मानने से मना कर दिया. हाई कोर्ट ने कहा है कि एमसीडी की मेयर और सचिव की शक्तियों का परीक्षण करेंगे और फिर अपना निर्णय देंगे.
भाजपा की मांग स्वीकारने से इनकार
आतिशी ने कहा, भाजपा इस मांग को लेकर हाई कोर्ट गई थी कि चुनाव नतीजे को हाई कोर्ट उसके पक्ष में घोषित करे, लेकिन कोर्ट ने उस परिणाम को घोषित करने से मना कर दिया. कोर्ट ने साफ कहा है कि हम परीक्षण करेंगे कि मेयर की क्या पावर है. मेयर की शक्तियों को लेकर संविधान और कानून क्या कहता है? आम आदमी पार्टी पहले दिन से यही कहती आई है कि भाजपा को संविधान और कानून का सम्मान करना पड़ेगा. भाजपा को कानून और संविधान के अनुसार चलना पड़ेगा. डीएमसी एक्ट में बिल्कुल स्पष्ट है कि मेयर ही पीठासीन अधिकारी होती हैं. मेयर के पास यह निर्णय लेने का अधिकार है कि कौन सा वोट वैध और कौन सा वोट अवैध है.

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