दिल्ली में बाइक टैक्सी पर फिर लगेगी रोक? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की याचिका पर सोमवार तक केंद्र सरकार से सोमवार को जवाब मांगा है. दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया है कि वो एक महीने में एग्रीगेटर कंपनियों के लिए पॉलिसी लाएंगे. इसमें कैब चालक और सवारियों की सुरक्षा, सरकार के रिकॉर्ड में वाहनों का ब्योरा आदि भी होगा.
दिल्ली में बिना समुचित लाइसेंस के चल रही ऐप बेस्ड बाइक टैक्सी सर्विस पर बैन लगाने के दिल्ली सरकार के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को अहम सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ सुनवाई करेगी. ओला, उबर और रैपिडो जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियों की बाइक सर्विस पर रोक लगाने की मांग वाली दिल्ली सरकार की अर्जी पर पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा था कि आप अपनी याचिका केंद्र सरकार (सॉलिसीटर जनरल) को भेज दें.
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की याचिका पर सोमवार तक केंद्र सरकार से सोमवार को जवाब मांगा है. दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया है कि वो एक महीने में एग्रीगेटर कंपनियों के लिए पॉलिसी लाएंगे. इसमें कैब चालक और सवारियों की सुरक्षा, सरकार के रिकॉर्ड में वाहनों का ब्योरा आदि भी होगा. दिल्ली हाईकोर्ट ने 26 मई को दिल्ली सरकार के उस नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी थी, जिसमें दिल्ली सरकार ने इन बाइक सर्विस पर रोक लगाने का आदेश दिया गया था.
ओला के वकील सीनियर एडवोकेट नीरज किशन कौल ने कहा कि सभी पक्षकारों को साथ सुना जाए. दिल्ली सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि बिना किसी लाइंसेंस और परमिट के बाइक का व्यवसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है. दिल्ली में तो रेपिडो का ताजा मामला है, जबकि इसी लाइसेंस के अभाव के आधार पर कई राज्यों ने ओला उबर जैसे एप आधारित बाइक कैब सेवा पर पाबंदी लगा रखी है. दिल्ली सरकार ने दिल्ली हाई के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. दिल्ली हाईकोर्ट ने बाइक सर्विस पर रोक लगाने वाले दिल्ली सरकार के फैसले पर रोक लगा दी थी.
अपनी अर्जी में दिल्ली सरकार ने कहा है कि इस मामले पर शीघ्र सुनवाई की जरूरत है क्योंकि एप आधारित चल रही बाइक टैक्सी सर्विस कैब कंपनियां बिना समुचित लाइसेंस के धडल्ले से चला रही हैं. ये 2020 में जारी गाइड लाइन और दिल्ली मोटर वाहन समग्र योजना 2023 का उल्लंघन है. योजना के तहत कमर्शियल वाहन चलाने के लिए सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी लेना जरूरी है. ये इसलिए भी जरूरी है कि उपभोक्ताओं और खुद दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस वेरिफिकेशन, लाइसेंस, वाहन में जीपीएस, पैनिक बटन जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था हो. इसके बाद ही बाइक टैक्सी को लाइसेंस दिया जा सकता है.

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