
दिल्ली में प्रदूषण पर कंट्रोल के दावे की खुली पोल, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट देने में फर्जीवाड़े का खुलासा
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दिल्ली सरकार ने पॉल्यूशन कंट्रोल के लिए ही ट्रैफिक चालान 500 रुपए से बढ़ाकर 10 हज़ार किया था, ताकि लोग तय समय पर अपनी गाड़ी के पॉल्यूशन की जांच कराते रहें. दिल्ली में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण गाड़ियों से निकलने वाला धुआं भी है, यही कारण है कि पिछले कुछ साल से जब पॉल्यूशन बढ़ता है, तो दिल्ली सरकार ईवन और ऑड फॉर्मूला अपनाती है, ताकि सड़कों से गाड़ियों को कम किया जा सके, लेकिन पॉल्यूशन केंद्र पर बैठे ये लोग चंद पैसे के लालच में सरकार के सारे प्लान को फेल कर रहे हैं और हम ज़हरीली हवा में सांस ले रहे हैं.
गर्मी के मौसम के बाद दिल्ली वाले बेसब्री से सर्दी के मौसम का इंतज़ार करते हैं, ताकि उमस भरी गर्मी से छुटकारा मिल सके, लेकिन दिल्ली में सर्दी शुरू होते ही दिल्ली-NCR पर प्रदूषण का क़हर टूट पड़ता है. हर साल दिल्ली सरकार प्रदूषण की रोकथाम को लेकर विंटर एक्शन प्लान तैयार करती है, लेकिन स्थिति वही ढाक के तीन पात. दिल्ली में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण पराली का जलना बताया जाता है. साथ ही गड़ियों से निकलने वाला प्रदूषण दिल्ली की हवाओं को ज़हर में बदल देता है. ऐसे में आजतक की इन्वेस्टिगेशन टीम ने गड़ियों के प्रदूषण जांच करने वाले केंद्र की पड़ताल की. इसमें जो ख़ुलासा हुआ, वो हैरान करने वाला है. दरअसल, ये प्रदूषण जांच केंद्र दिल्ली की हवाओं को ज़हरीला बनाने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं. पढ़िए ये खास रिपोर्ट...
सबसे पहले बात करते हैं नोएडा के सेक्टर-20 कोतवाली की... यहां हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि सेक्टर-20 कोतवाली का इस स्टिंग ऑपरेशन से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन इस स्टिंग ऑपरेशन की शुरुआत नोएडा के सेक्टर-20 कोतवाली से ही होती है. हमारे रिपोर्टर सबसे पहले यहां के मालखाने में जमा गाड़ियों का मुआयना करते हैं, इसके बाद कुछ गाड़ियों का फोटो खींचकर इस पड़ताल की शुरुआत करते हैं. ये गाड़ियां अलग-अलग ट्रैफ़िक रूल्स को तोड़ने या एक्सीडेंट के कारण थानों में बंद हैं. जिस गाड़ी को हमने चुना, वो डेढ़-दो साल से थाने में बंद हैं. पड़ताल में हम देखना चाहते थे कि नोएडा और दिल्ली में प्रदूषण जांच केंद्र कितनी ईमानदारी से काम कर रहे हैं, हमारी पड़ताल में एक बड़ी बेईमानी का खुलासा हुआ.
ऐसे बन रहे फर्जी सर्टिफिकेट
हम कुछ गड़ियों का फोटो खींचकर नोएडा स्थित सेक्टर-95 के एक पॉल्यूशन केंद्र पहुंचे, जहां हमने बताया कि मेरी गाड़ी दिल्ली में खड़ी है. पॉल्यूशन एक्सपायर होने के कारण हम अपनी गाड़ी निकाल नहीं पा रहे हैं. अगर वे हमारी पॉल्यूशन सर्टिफिकेट बना देते हैं, तो हम गाड़ी सड़क पर निकाल सकते हैं. पॉल्यूशन केंद्र पर बैठे शख्स का नाम नरेंद्र है. नरेंद्र ने आराम से पूछा कि गाड़ी का नंबर बताइए. गाड़ी का नंबर लेने के बाद हमने नरेंद्र को गाड़ी का फोटो दिखाया. उसके बाद नरेंद्र ने बिना कुछ पूछताछ किए, हमें बड़े ही आराम से थाने में बंद गाड़ी का पॉल्यूशन निकाल कर दे दिया.
बिना गाड़ी की जांच किए मिला सर्टिफिकेट
पॉल्यूशन सर्टिफिकेट बनाते समय नरेंद्र ने एक बात ज़रूर पूछी कि गाड़ी थाने में बंद तो नहीं है. दरअसल, नरेंद्र कहना चाह रहा था कि गाड़ी थाने में बंद नहीं होनी चाहिए, बाक़ी सब चल जाता है. इस घटना से आप समझ सकते हैं कि कैसे बिना गाड़ी के नरेंद्र ने हमें एक साल का प्रदूषण का सर्टिफिकेट दे दिया, जिसमें गाड़ी को प्रदूषण में पास भी दिखाया. इतना ही नहीं, नोएडा के केंद्र में बैठे नरेंद्र ने हरियाणा के केंद्र से बना पॉल्यूशन सर्टिफिकेट हमें थमा दिया. जो हमारे लिए काफ़ी चौंकाने वाला था, क्योंकि नरेंद्र को पता है कि बिना गाड़ी लाए पॉल्यूशन नहीं किया जा सकता. इसलिए हरियाणा के पॉल्यूशन केंद्र से सेटिंग की हुई है, ताकि ज्यादा कमाई की जा सके. हमने नरेंद्र से पूछा है कि सर्टिफिकेट ऑरिजिनल तो है ना? क्योंकि ये हरियाणा का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट है, तो हमें बताया गया कि पॉल्यूशन ऑनलाइन है. कहीं का भी हो, कई दिक्कत नहीं है. नरेंद्र ने ऐसा इसलिए किया, ताकि अगर कभी कोई जांच होती है, तो इसमें वह खुद ना फंसे. क्योंकि हर सर्टिफिकेट में लिखा होता है कि वो जारी कहां से हो रहा है, लेकिन नरेंद्र को नहीं पता था कि आजतक का खुफिया कैमरा सब देख रहा है.

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