
दिल्ली आए फडणवीस, शिंदे-अजित मांग रहे जो विभाग उन पर भी बीजेपी की नजर!
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सूत्रों के अनुसार, बीजेपी इस बार भारी मांग वाले विभागों से समझौता करने के मूड में नहीं है. बीजेपी की नजर एकनाथ शिंदे के शहरी विकास विभाग और अजित पवार के वित्त विभाग पर भी है. इसके बदले में, बीजेपी शिंदे को राजस्व और लोक निर्माण विभाग, जबकि अजित पवार को बिजली या सिंचाई विभाग देने की पेशकश कर सकती है.
महाराष्ट्र में महायुति की सरकार बनने के बाद अब सबकी निगाहें मंत्रालयों के बंटवारे पर हैं. इसको लेकर दिल्ली में महायुति के नेताओं की बैठक होनी है. इसमें बीजेपी के बड़े नेता भी शामिल रहेंगे. इसमें सीएम देवेंद्र फडणवीस और दोनों डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और अजित पवार के शामिल होने की जानकारी थी. लेकिन अब बताया जा रहा है कि शिंदे को इस बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली नहीं बुलाया गया.
शिंदे के कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि एकनाथ शिंदे को आज दिल्ली में किसी नेता से मिलने के लिए नहीं बुलाया गया या उनकी दिल्ली यात्रा की कोई योजना नहीं है. इस बीच, सीएम फडणवीस और डीसीएम अजित पवार की दिल्ली में कई शिष्टाचार मुलाकातें तय हैं. साथ ही, इस यात्रा के दौरान बीजेपी के शीर्ष नेताओं के साथ पोर्टफोलियो आवंटन पर चर्चा होने की संभावना है. फडणवीस राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की है.
इस बीच सूत्रों के अनुसार, बीजेपी इस बार भारी मांग वाले विभागों से समझौता करने के मूड में नहीं है. बीजेपी की नजर एकनाथ शिंदे के शहरी विकास विभाग और अजित पवार के वित्त विभाग पर भी है. इसके बदले में, बीजेपी शिंदे को राजस्व और लोक निर्माण विभाग, जबकि अजित पवार को बिजली या सिंचाई विभाग देने की पेशकश कर सकती है.
14 दिसंबर तक हो सकता है मंत्रिमंडल विस्तार
पीटीआई के मुताबिक बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने बुधवार को कहा कि देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार 14 दिसंबर तक होने की संभावना है. उनके कार्यालय ने कहा कि फडणवीस बुधवार को दिल्ली के लिए रवाना हुए. उन्होंने कहा कि यह एक शिष्टाचार भेंट थी, मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी यह पहली मुलाकात थी, क्योंकि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से मिलेंगे.
एक बीजेपी नेता ने कहा कि शिवसेना को गृह विभाग नहीं मिलेगा और राजस्व विभाग भी आवंटित होने की संभावना नहीं है. राजनेता ने कहा कि बातचीत में देरी हो रही है क्योंकि तीन दल (महायुति के सहयोगी बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी) इसमें शामिल हैं.

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