
तीर्थयात्रियों और नॉन-कश्मीरियों पर आतंकी हमले, J&K में धारा 370 हटने के बाद कितना बढ़ा या घटा टैररिज्म?
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जम्मू-कश्मीर के रियासी में आतंकियों ने घात लगाकर तीर्थयात्रियों की बस पर हमला किया. अटैक के बाद गाड़ी खड्ड में जा गिरी, जिसमें 10 मौतें हो चुकीं. घटना नई कैबिनेट के शपथ ग्रहण के दौरान हुई. अब विपक्ष इसे लेकर हमलावर है. वो आरोप लगा रहा है कि जम्मू-कश्मीर एक बार फिर टैरर हॉटस्पॉट बन चुका. जानिए, क्या कहते हैं आंकड़े.
जम्मू-कश्मीर के रियासी इलाके में टैररिस्ट्स ने श्रद्धालुओं को लेकर जा रही एक बस पर हमला कर दिया, जिसमें 10 मौतें हो चुकीं. लगभग महीनेभर पहले ही पहलगाम में भी एक टूरिस्ट बस पर आतंकी हमला हुआ. विपक्षी दल इन घटनाओं को लेकर सत्ता पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं. इस बीच एक संगठन ने आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेते हुए गैर-कश्मीरियों के लिए चेतावनी भी दे दी.हालांकि कश्मीर में आतंकवाद की सक्रियता बढ़ने के बाद भी कैजुअलिटी घटी है.
आतंकियों की भर्ती ज्यादा लेकिन पकड़ाई भी ज्यादा
अगस्त 2019 में धारा 370 हटने के बाद कश्मीर में आतंकी घटनाएं बढ़ीं. कुछ सिक्योरिटी इंडिकेटर ये इशारा करते हैं, जैसे आतंकवादियों की नियुक्त बढ़ना. लेकिन यहां एक पेंच है. आतंकियों और ओवरग्राउंड वर्कर्स की गिरफ्तारियां भी बेहद तेजी से हो रही थीं. काउंटर-इनसर्जेंसी ऑपरेशन में अगस्त 2019 से लेकर जून 2023 के बीच लगभग ढाई सौ आतंकवादी और उनकी मदद करने वाले लोग पकड़े गए. ये साल 2015 से धारा 370 हटने तक हुए अरेस्ट से 71 गुना ज्यादा रहा.
डेकन हेराल्ड में छपी रिपोर्ट में आधिकारिक डेटा के हवाले से धारा 370 हटने से चार साल पहले और पोस्ट 370 सालों की तुलना है. इसके मुताबिक, टैरर रिक्रूटमेंट 13 प्रतिशत से सीधे 39 प्रतिशत बढ़ा. वहीं आठ ग्रेनेड और 13 आईईडी अटैक हुए. 370 लागू रहते हुए ये चार सालों में 4 ग्रेनेड और 7 आईईडी हमले हुए थे.
कम हो चुकी कैजुअलिटी

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