
ट्रंप-पुतिन की दुश्मनी की कीमत चुकाएगी ये ऑयल कंपनी, बेचना पड़ रहा तेल का कुआं-रिफाइनरी
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रूस की दो बड़ी तेल कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों के आगे चरमराने लगी हैं. रूस की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में से एक लुकोइल ने अमेरिकी प्रतिबंध के बाद अपनी अंतर्राष्ट्रीय संपत्तियां बेचने की घोषणा की है. लुकोइल का यूरोप, इराक, सेंट्रल एशिया में तेल का विशाल कारोबार है. इराक में लुकोइल के पास दुनिया के सबसे बड़े ऑयल फील्ड में से एक में 75 फीसदी हिस्सेदारी है.
अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में रूसी तेल कंपनियों का साम्राज्य चरमराने लगा है. रूस की दूसरी बड़ी तेल कंपनी लुकोइल ने कहा है कि वो अपनी अंतर्राष्ट्रीय संपत्तियों की बिक्री करेगी. रूस की दूसरी सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी लुकोइल ने सोमवार को कहा कि वह पिछले हफ़्ते अमेरिका द्वारा यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर इस कंपनी पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद अपनी अंतर्राष्ट्रीय संपत्तियां बेचेगी.
फरवरी 2022 में शुरू हुए यूक्रेन जंग के बाद अमेरिकी प्रतिबंध की वजह से ये पहली बार है कि कोई कंपनी योजनाबद्ध तरीके से अपनी संपत्ति बेच रही है.
रॉयटर्स के अनुसार लुकोइल ने अपने बयान में कहा, "परिसंपत्तियों की बिक्री OFAC विंड डाउन लाइसेंस के तहत की जा रही है. यदि आवश्यक हुआ तो कंपनी अपनी अंतर्राष्ट्रीय परिसंपत्तियों के निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए लाइसेंस के विस्तार के लिए आवेदन करने की योजना बना रही है."
कंपनी ने कहा है कि संभावित खरीदारों की बोलियों पर विचार शुरू हो गया है.
बता दें कि 22 अक्टूबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस की सबसे बड़ी तेल कंपनियों, लुकोइल और रोसनेफ्ट पर यूक्रेन संबंधी प्रतिबंध लगा दिए. ये दोनों कंपनियां रूस के 50 फीसदी कच्चे तेल का उत्पादन करती हैं.
15 अक्टूबर को ब्रिटेन ने भी लुकोइल और रोसनेफ्ट के साथ-साथ 44 शैडो टैंकर को बैन किया. ये ऐसे टैंकर थे जिनके मालिकाना हक के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. ब्रिटेन ने कहा कि इन प्रतिबंधों का मकसद कच्चे तेल से रूस को होने वाली कमाई को कम करना है.

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