
टॉप नक्सली कमांडर देवजी का सरेंडर, ऐसे 'मजबूर' हुआ 1 करोड़ का इनामी तिरुपति
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टॉप माओवादी कमांडर और संगठन का अहम रणनीतिकार थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने रविवार को इसकी पुष्टि की है. उसके सिर पर 1 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था.
देश में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के बीच टॉप माओवादी कमांडर थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया. एक करोड़ के इनामी इस नेता को संगठन का अहम रणनीतिकार माना जाता था. मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले हुए इस सरेंडर को सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है.
थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी (62) तेलंगाना के जगतियाल जिले का रहने वाला है. उसके सरेंडर को प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. देवजी ने दिवंगत जनरल सेक्रेटरी नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू की जगह ली थी, जिनकी मई 2025 में मौत हो गई थी. इसके साथ माओवादी नेता मल्ला राजी रेड्डी ने भी सरेंडर किया है.
पुलिस के मुताबिक, देवजी और अन्य नक्सली नेताओं का सरेंडर कुछ दिनों में औपचारिक रूप से दिखाया जाएगा, फिलहाल वे तेलंगाना पुलिस के पास हैं. देवजी को पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी का गठन करने वालों में माना जाता है. आगे चलकर वह सीपीआई (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का अहम सदस्य और पार्टी के पोलित ब्यूरो का मेंबर बना.
वो सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के इंचार्ज के तौर पर भी काम कर रहा था. छत्तीसगढ़ के माड इलाके से गतिविधियां संचालित करता था. साल 1982 में जगतियाल जिले के कोरुतला में इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान वो रेडिकल स्टूडेंट यूनियन से प्रभावित हुआ. उसी दौरान करीमनगर जिले में आरएसयू और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बीच झड़पें हुईं.
देवजी को आरोपी बनाया गया. साल 1983 में वो अंडरग्राउंड हो गया. साल 1983-84 के दौरान उसने गढ़चिरौली दलम में काम किया. साल 1985 में उसे एरिया कमेटी मेंबर बनाया गया. साल 2001 में वह सेंट्रल कमेटी मेंबर बना और साल 2016 में सीएमसी का इंचार्ज नियुक्त हुआ. सूत्रों का कहना था कि देवजी के इस कदम का अन्य वरिष्ठ नेताओं ने विरोध किया था.
इसी बीच, सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स की अगुवाई में सुरक्षा बलों ने 17 फरवरी को छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर नांबी और कोरगोटालू हिल्स जैसे इलाकों में 'KGH 2' नाम से बड़ा ऑपरेशन शुरू किया था, जिसे कर्रेगुट्टा हिल्स के नाम से भी जाना जाता है. इस दौरान 300 नक्सलियों की तलाश की जा रही थी, जिनमें कई बड़े और कुख्यात नक्सली शामिल थे.

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