
जानिए कौन हैं जामिया यूनिवर्सिटी के नए कुलपति मजहर आसिफ? JNU से रहा कनेक्शन
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प्रोफेसर मजहर आसिफ वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के भाषा स्कूल में प्रोफेसर हैं. जेएनयू के प्रोफेसर आसिफ नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 की मसौदा समिति के सदस्य थे. वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय दोनों की कार्यकारी परिषदों के सदस्य के रूप में काम कर चुके हैं.
प्रोफेसर मजहर आसिफ ने देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) कुलपति का पद संभाला है. वे जामिया के 16वें वाइस चांसलर बने हैं. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को मजहर आसिफ को जामिया मिलिया इस्लामिया का कुलपति नियुक्त किया है. नवंबर 2023 में नजमा अख्तर का कार्यकाल खत्म होने के लंबे समय बाद उन्हें वीसी बनाया गया है.
कौन हैं प्रोफेसर मजहर आसिफ? प्रोफेसर मजहर आसिफ वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के भाषा स्कूल में प्रोफेसर हैं. जेएनयू के प्रोफेसर आसिफ नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 की मसौदा समिति के सदस्य थे. वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय दोनों की कार्यकारी परिषदों के सदस्य के रूप में काम कर चुके हैं.
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा पहलों जैसे कि राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (ओपन स्कूल) और राष्ट्रीय उर्दू भाषा संवर्धन परिषद में भी लीडरशिप भूमिकाएं निभाई हैं. उनकी फ़ारसी, अंग्रेज़ी और असमिया में नौ पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं, जिनमें एक व्यापक फ़ारसी-असमिया-अंग्रेज़ी शब्दकोश भी शामिल है. उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में 20 से अधिक रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए हैं, जो अकादमिक चर्चा में उनकी सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है.
वीसी पद संभालने के बाद "नौशेरा का शेर" के पास पहुंचे गुरुवार को वीसी ऑफिस कैंपस में यूनिवर्सिटी के टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ ने गर्मजोशी से प्रोफेसर मजहर आसिफ का स्वागत किया. ज्वाइनिंग के तुरंत बाद वह यूनिवर्सिटी कैंपस में स्थित ब्रिगेडियर उस्मान की समाधि पर गए और उन्हें श्रद्धांजलि दी. वह जामिया के पहले कुलपति हैं जिन्होंने कार्यभार संभालने के तुरंत बाद बाद ब्रिगेडियर उस्मान की समाधि पर फूलमाला अर्पित की है. ब्रिगेडियर उस्मान, जिन्हें "नौशेरा का शेर" के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय सेना में एक उच्च पदस्थ अधिकारी थे जिन्होंने 1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में वीरगति पाई थी.
प्रोफेसर मजहर आसिफ ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन और जेएमआई के संस्थापक सदस्य डॉ. एम.ए. अंसारी को विश्वविद्यालय परिसर में स्थित उनकी समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी.
वीसी बनने के बाद क्या कहा? इस दौरान उन्होंने कुलपति कार्यालय के बैठक हॉल में अपने संबोधन की शुरुआत यह कहकर की कि केवल एक ही आदर्श वाक्य और एक ही लक्ष्य है और वह है इस विश्वविद्यालय को सर्वोच्च स्थान पर कैसे ले जाया जाए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वह एक छात्र और कर्मचारी केंद्रित व्यक्ति हैं. उन्होंने कहा, "यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स को अच्छा रहन-सहन, भोजन, सुरक्षा उपलब्ध कराना हमारी जिम्मेदारी है. आप लोगों के सहयोग से हम ऐसा करेंगे और जेएमआई को उच्च स्तर पर ले जाने का प्रयास करेंगे. अगर हम मिलकर काम करेंगे तो हमें सर्वशक्तिमान अल्लाह की भी मदद मिलेगी."

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