
"जरूरत पड़े तो लॉकडाउन लगाओ," दिल्ली के प्रदूषण पर देखें SC की सख्त टिप्पणियां
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दिल्ली एनसीआर में दम घुटने लगा है. हवा इस कदर जहरीली है कि खुद सुप्रीम कोर्ट को आज हालात पर सख्त टिप्पणियां करनी पड़ी. सोमवार को सर्वोच्च अदालत इस मसले पर दोबारा सुनवाई करेगी लेकिन उससे पहले कोर्ट ने आज सरकार को सलाह दी कि संभव हो तो दो दिन का लॉकडाउन लगाएं. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्यों को प्रदूषण कम करने के कदमों पर आपात बैठक में लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी मांगी है. सीजेआई ने केंद्र से कहा कि आपकी ऐसी धारणा है कि पूरे प्रदूषण के लिए किसान जिम्मेदार है. चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना ने कहा, मैं यह नहीं बताना चाहता कि प्रदूषण पर पराली जलाने का कितना असर है और बाकी पटाखे, वाहन, डस्ट और निर्माण का योगदान है. आप हमें बताएं कि प्रदूषण पर नियंत्रण के तत्काल उपाय क्या हैं. सीजेआई ने कहा, अगर संभव हो तो दो दिन का लॉकडाउन लगा दें. देखें ये वीडियो.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

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