
जम्मू-कश्मीर में तीन संदिग्ध ओवर ग्राउंड वर्कर चढ़े सुरक्षाबलों के हत्थे, पूछताछ शुरू
AajTak
दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में पुलिस ने शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बताए गए तीन संदिग्ध ओवर ग्राउंड वर्कर्स को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत हिरासत में लिया है. पुलिस के अनुसार, ये तीनों बार-बार गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल पाए गए थे. सभी को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जम्मू की सेंट्रल जेल कोट भलवाल भेज दिया गया है.
जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में पुलिस ने शांति और सुरक्षा के लिए खतरा माने जा रहे तीन संदिग्ध ओवर ग्राउंड वर्कर्स को कड़े पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत हिरासत में लिया है. पुलिस ने शनिवार को इसकी पुष्टि की.
न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि हिरासत में लिए गए तीनों व्यक्ति बार-बार ऐसे कृत्यों में शामिल पाए गए, जो सार्वजनिक व्यवस्था, शांति और सुरक्षा के प्रतिकूल थे. अधिकारी के अनुसार, इनके खिलाफ पहले भी एहतियाती कदम उठाए गए थे, लेकिन इसके बावजूद वो गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त रहे.
ओवर ग्राउंड वर्कर पीएसए के तहत हिरासत में
पुलिस ने स्पष्ट किया कि ओवर ग्राउंड वर्कर्स वो लोग होते हैं, जो आतंकियों को प्रत्यक्ष रूप से हथियार उठाए बिना लॉजिस्टिक और अन्य प्रकार का सहयोग प्रदान करते हैं. इस तरह की गतिविधियों को सुरक्षा एजेंसियां गंभीर खतरे के रूप में देखती हैं.
हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान ओवैस अहमद लोन, मशूक अहमद शाह और सुब्ज़र अहमद गनी के रूप में की गई है. पुलिस अधिकारी ने बताया कि इन तीनों के खिलाफ पीएसए के तहत कार्रवाई की गई है.
गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने का शक

महायुद्ध के 19 दिन हो चुके हैं. मैं इस वक्त इजरायल के तेल अवीव में हूं. आज की रात महायुद्ध में बहुत गंभीर हो सकती है. क्योंकि महायुद्ध अब बेकाबू होने के मोड़ पर पहुंच सकता है. हमारा मकसद डराना नहीं है. ध्यान से इस बात को कहने की वजह समझिएगा. अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान की जंग में एक दूसरे पर ताबड़तोड़ वार-पलटवार हो रहे हैं. ताजा खबर ये है कि इजरायल ने ईरान की सबसे बड़े गैस ठिकाने पर हमला किया है. इजरायल ने ये हमला अमेरिका की मदद से किया है. जो दक्षिण पश्चिम ईरान में है.

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की NSA अजित डोभाल संग बैठक, डिफेंस-इंटेलिजेंस समेत कई मुद्दों पर हुई बात
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के साथ बैठक की, जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा हुई. दोनों देशों ने डिफेंस, इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी में साझेदारी मजबूत करने पर जोर दिया.

ईरान अपने सुरक्षा प्रमुख की मौत के शोक में डूबा हुआ है और इंतकाम की कसमें खा रहा है. उधर इजरायल और अमेरिका इस उम्मीद में हैं कि उसने ईरान के तमाम बड़े नेता, कमांडर और प्रमुख मार दिए हैं, तो अब ईरान सरेंडर करेगा. लेकिन ईरान सरेंडर के मोड में नहीं है. इस बीच दुनिया हैरान है कि जब इजरायल और अमेरिका इतने हमले कर रहा है तो ईरान के सुरक्षा प्रमुख खुद को सुरक्षित क्यों नहीं रख पाए. इजरायल ने कैसे अली लारीजानी को मारा.

जैसे जैसे अमेरिका, इजरायल और ईरान का युद्ध आगे बढ़ रहा है वैसे वैसे तबाही की तस्वीरें सामने आ रही हैं, एक तरफ अमेरिका और इजरायल ईरान को निशाना बना रहे हैं उनके शहरों में धमाके कर रहे हैं. दूसरी ओर ईरान भी पलटवार कर रहा है. लेकिन आज सुबह इजरायली हमले के बाद बेरूत का रिहायशी इलाका कब्रगाह में बदल गया और चीख पुकार मचने लगी, इजरायल ने बेरूत में 22 मंजिला इमारत को निशाना बनाया गया.

दिल्ली-एनसीआर में पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम अचानक बदल गया है. ठंडी हवाएं, बादल और हल्की बारिश से तापमान में गिरावट आई है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक हल्की बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का अनुमान जताया है. गुरुवार और शुक्रवार के लिए येलो अलर्ट जारी है. तापमान 27 से 31 डिग्री के बीच रह सकता है और 21 मार्च के बाद मौसम धीरे-धीरे साफ होगा.

16 मार्च को वाराणसी में गंगा में नाव पर इफ्तार पार्टी मनाना कुछ मुस्लिम युवकों को महंगा पड़ गया. बीजेपी और हिंदूवादी संगठन का आरोप है कि, इन लोगों ने रोजा इफ्तार पार्टी करने के बाद गंगा नदी में बिरयानी और हड्डियां फेंक दीं. जैसे ही स्थानीय बीजेपी नेता की ओर से इन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई, पुलिस हरकत में आई और आनन फानन में 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. अब संत समाज और बीजेपी इसे हिंदुओं के खिलाफ सोची समझी साजिश करार दे रहे हैं तो विपक्ष पूछ रहा है कि, गंगा में इफ्तार पार्टी करने से कौन सा कानून तोड़ा गया जो पुलिस ने इन लोगों को गिरफ्तार कर लिया. सवाल है कि, ये कौन लोग हैं जिन्हें यूपी की अमन शांति रास नहीं आ रही.

जेडीयू नेता केसी त्यागी ने पार्टी की सदस्यता का नवीनीकरण न कराकर अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट कर दिया है. उनके इस कदम को बिहार की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है. साथ ही, पार्टी के भीतर नई पीढ़ी के उभार और पुराने नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं.






