
छतों पर स्नाइपर्स, नौजवान को सिर में गोली लगते देखा... जैसे-तैसे दुनिया को ईरान बता रहा है अपनी आह!
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ईरानी जमीन जंग का मैदान बनी हुई है. यूं तो इस देश में सख्ती और कम्युनिकेशन ब्लैकआउट है, लेकिन वहां से रिस रिसकर जो जानकारियां आ रही है वो भयावह स्थिति को बता रही है. चश्मदीद साफ बता रहे हैं कि देश में खून खराबा मचा हुआ है. छतों पर स्नाइपर्स तैनात हैं और लोगों को गोलियां मारी जा रही है.
"मैं कुछ मिनट के लिए कनेक्ट हो पाया, बस यह कहने के लिए कि यहां खून-खराबा हो रहा है," तेहरान के एक बिजनेसमैन सईद ने सैटेलाइट इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करके दुनिया को मैसेज भेजने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली. हजारों दूसरे लोगों की तरह सईद भी एक ऐसे देश से बात कर रहे थे जो लगभग पूरी तरह से कम्युनिकेशन ब्लैकआउट में डूबा हुआ है, जहां सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को अंधाधुंध ताकत से दबाया जा रहा है.
28 दिसंबर 2025 को आर्थिक मुश्किलों को लेकर शुरू हुए प्रदर्शन अब दशकों में ईरान के धार्मिक शासन के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गए हैं. शुरुआत में बेतहाशा महंगाई, खाने-पीने की चीज़ों की बढ़ती कीमतों और राष्ट्रीय मुद्रा के गिरने से लोगों में गुस्सा भड़का, और यह अशांति तेज़ी से पूरे देश में फैल गई.
विरोध प्रदर्शन सभी 31 प्रांतों में फैल गए, जिसमें छात्र, बाज़ार के व्यापारी और आम नागरिक सड़कों पर उतर आए. नारे जल्द ही आर्थिक शिकायतों से बदलकर खुले तौर पर सरकार विरोधी नारे बन गए, जिसमें प्रदर्शनकारी बड़े राजनीतिक बदलाव और धार्मिक शासन को खत्म करने की मांग कर रहे थे.
पाबंदियों के बावजूद चश्मदीदों की गवाही और दमन की कहानियां सामने आ रही है. ईरानी लोग ऑनलाइन होने के लिए जोखिम भरे और जुगाड़ वाले तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. जिसमें सैटेलाइट लिंक और खुफिया कनेक्शन शामिल हैं. उन्होंने बताया है कि भीड़ पर गोलियां चलाई गईं, छतों पर स्नाइपर तैनात थे और अस्पताल गंभीर रूप से घायल प्रदर्शनकारियों से भरे हुए थे.
'सरकार हत्याएं कर रही है'
एक पब्लिशिंग कंपनी में काम करने वाली 30 साल की एक प्रदर्शनकारी यासी ने कहा, "सरकार हत्याएं कर रही है." न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा इंटरव्यू किए गए अन्य लोगों की तरह उसने भी सुरक्षा के लिए अपनी पहचान गुप्त रखने का अनुरोध किया.

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