
खरगोन : 1992 से लेकर 2022 तक हर दंगे का दंश झेला इस परिवार ने, अब दीवारों पर लिखा 'मकान बिकाऊ है'
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मध्य प्रदेश के खरगोन में हिंसा के शिकार कई परिवार घर छोड़कर कहीं और बसना चाहते हैं. कई परिवारों ने अपने घरों की दीवारों पर 'यहां मकान बिकाऊ है' लिखवा दिया है. इन परिवारों ने आप सरकार से मांग की है कि या तो इन सब के लिए यहां पर सुरक्षा के उचित इंतजाम किए जाएं या फिर इन्हें किसी दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया जाए.
खरगोन में बार-बार हिंसा से यहां के कई लोग इतने परेशान हैं कि वे यहां से घर छोड़कर जाना चाहते हैं. कई परिवारों ने तो घर की दीवारों पर लिख दिया है कि मकान बिकाऊ है. हिंसा से परेशान एक परिवार ने बताया कि हिंसा में उनके घर में उपद्रवियों ने आग लगा दी. इससे पहले साल 1992 में हुई हिंसा में भी उनके घर में आगजनी की गई थी. परिवार ने बताया कि इसके अलावा 2015 और 2018 में भैंस और गाड़ी में भी आग लगा दी गई थी.
खरगोन के संजय नगर इलाके के कई परिवार ऐसे हैं जो बार-बार हो रही हिंसा से परेशान हैं और उन्होंने अपने घरों की दीवारों पर लिख दिया है कि 'मकान बिकाऊ है'. बता दें कि रविवार को रामनवमी के जुलूस पर पथराव के बाद आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं ने कुछ ही घंटों में दंगे का रूप ले लिया. दंगे में कई घर झुलस गए. दंगे की आंच में कुछ घर जलकर राख भी हो गए.
आजतक ऐसे ही एक परिवार से मिला जिसने 1992 से लेकर 2022 तक हर बार हिंसा का दंश झेला है. संजय नगर के पन्नालाल चंदौर और उनकी पत्नी के मुताबिक, 1992 में दंगाईयों ने उनके घर को आग लगा दी थी, जबकि 2015 और 2018 में हुई हिंसा के दौरान गाड़ी और मवेशियों को नुकसान पहुंचाया गया था.
आगजनी में खाने-पीने तक का सामान नहीं बचा
आजतक ने जब चांदौर परिवार के घर का दौरा किया तो पाया कि रामनवमी जुलूस के बाद हुई हिंसा में इनके घर में बुरी तरह आग लगा दी गई है. सिर्फ यही नहीं, इनके पड़ोस के भी कई मकानों और गाड़ियों को आग लगाई गई है. चांदौर परिवार के मुताबिक, उनकी गृहस्थी के साथ-साथ खाने पीने की भी सब चीज़ें जला दी गई.
चांदौर परिवार के अलावा पड़ोस में रहने वाले परिवारों ने भी बार बार की हिंसा से परेशान होकर घर पर 'मकान बिकाऊ है' लिखवा दिया है. इन परिवारों का कहना है कि हमेशा से उसके घर को सबसे पहले निशाना बनाया जाता है, क्योंकि इलाके में हिंदुओं का सबसे पहला घर उनका ही है.

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