
क्या दिल्ली वास्तव में राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रही है? 'दंगल' में BJP प्रवक्ता ने दिया ये जवाब
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बीजेपी कह रही है कि दिल्ली सरकार को तुरंत बर्खास्त करना चाहिए क्योंकि दिल्ली में सरकारी मशीनरी काम नहीं कर रही. लोकतंत्र और संविधान का पालन नहीं हो रहा. तो आम आदमी पार्टी कहती है कि अगर सरकार चाहे तो अभी चुनाव करा ले. ऐसे में सवाल है कि केजरीवाल की जमानत पर फैसले से पहले बीजेपी की राष्ट्रपति शासन वाली मांग के पीछे की सियासत क्या है?
दिल्ली के बीजेपी विधायकों ने राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखकर आम आदमी पार्टी की सरकार बर्खास्त करने की मांग की थी. उस चिट्ठी को राष्ट्रपति ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेज दिया है. इसे लेकर तमाम सियासी आशंकाओं पर बयानबाजियां हो रही हैं. बीजेपी कह रही है कि दिल्ली सरकार को तुरंत बर्खास्त करना चाहिए क्योंकि दिल्ली में सरकारी मशीनरी काम नहीं कर रही. लोकतंत्र और संविधान का पालन नहीं हो रहा. तो आम आदमी पार्टी कहती है कि अगर सरकार चाहे तो अभी चुनाव करा ले.
ऐसे में सवाल है कि केजरीवाल की जमानत पर फैसले से पहले बीजेपी की राष्ट्रपति शासन वाली मांग के पीछे की सियासत क्या है? क्या दिल्ली में समय से पहले चुनाव कराये जा सकते हैं या फिर अगर राष्ट्रपति शासन लगता है तो दिल्ली के चुनाव टल भी सकते हैं? ऐसी तमाम आशंकाएं और सवाल हैं, जिन पर बीजेपी और आम आदमी पार्टी के नेताओं के साथ चित्रा त्रिपाठी ने मंगलवार को आजतक के खास शो 'दंगल' में बड़ी चर्चा की.
इस दौरान सवाल पूछा गया कि जब कुछ महीनों बाद ही दिल्ली में चुनाव होने हैं तो अचानक क्यों बीजेपी के विधायकों ने राष्ट्रपति शासन की मांग कर डाली और क्या दिल्ली वास्तव में राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रही है? इसके जवाब में बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि अगर पिछले शेड्यूल के हिसाब से चुनाव आयोग चुनाव कराता है तो यानी फरवरी 2025 में चुनाव होते हैं तो लगभग 150 दिन बाद राष्ट्रवादी शासन लगने वाला है, वो भी जनता के द्वारा. और अब जिस प्रकार से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के साथ आने के बाद भी सात में से जीरो मिला (लोकसभा चुनाव में), मतलब भ्रष्टाचार का बदला लोगों ने वोट से दिया तो मुझे लगता है कि राष्ट्रवादी शासन लगने वाला है.
बीजेपी नेता ने कहा कि जहां तक राष्ट्रपति शासन की मांग है तो ये अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दल के नेता करते रहते हैं. लगभग 150 बार पिछले 10 वर्षों में अलग-अलग पार्टियों ने अलग-अलग जगहों पर राष्ट्रपति शासन की मांग की है क्योंकि उनको लगा कि वो महत्वपूर्ण मुद्दे उठाना चाहते हैं. जैसे कि दिल्ली में ही 29 अप्रैल 2021 दिल्ली कांग्रेस ने राष्ट्रपति शासन की मांग की. 10 मई 2024 हरियाणा में मांग की. कांग्रेस ने 5 जून 2024 बंगाल में मांग की. 2022 में भी बंगाल में मांग की. 2023 जुलाई में महाराष्ट्र में मांग की. 2019 में तेंलगाना में मांग की. आम आदमी पार्टी ने भी पंजाब में मांग की थी. तो आम आदमी पार्टी-कांग्रेस मांग करते तो वो चमत्कार, सेक्यूलर राष्ट्रपति शासन और हम मांग कर लो तो वो कम्युनल हो जाता है.

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