
कोलकाता के अस्पताल कांड पर न्याय की आवाज दबाने वाले गुंडे कौन? जानें आधी रात के बवाल का एक-एक सच
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14 और 15 अगस्त की दरम्यानी रात को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जो कुछ हुआ, वो भयानक था. उपद्रवियों की भीड़ ने अचानक अस्पताल में घुस कर ऐसी तोड़-फोड़ मचाई कि हर कोई सहम गया.
RG Kar Hospital Mob Attack: कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में 14 अगस्त की रात हुई तोड़फोड़ को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है. हाईकोर्ट ने इस घटना को राज्य मशीनरी की पूर्ण नाकामी का सबूत बताते हुए आरजी कर अस्पताल को बंद करने का फरमान सुनाया है और मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किए जाने का आदेश दिया है.
चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ ने पुलिस, प्रशासन और सरकार को जमकर फटकार लगाई है. हाई कोर्ट ने कह दिया कि ऐसे हालात में डॉक्टर निडर होकर कैसे काम करेंगे? उधर, अस्पताल पर हुए इस भयानक हमले का पूरा हम आपको बताएंगे, जिसे जानकर आपके होश उड़ जाएंगे.
सरकारी वकील ने रखा राज्य का पक्ष कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले को लेकर सख्त टिप्पणी की है. हाई कोर्ट ने सरकार को नाकाम करार दिया है. चीफ जस्टिस ने राज्य सरकार से कहा कि इस घटना के बाद आप क्या कर रहे हैं? एहतियात के तौर पर क्या कदम उठाए गए थे? सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि दोपहर तीन बजे सीबीआई जांच के निर्देश दिए गए थे. जहां तक बर्बरता से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की बात है तो वहां अचानक 7000 लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई फिर आंसू गैस छोड़ी गई, पुलिसवाले घायल हुए.
राज्य मशीनरी की पूरी तरह विफलता हाई कोर्ट ने कहा कि आमतौर पर अगर लोग अस्पताल में घुसते हैं तो आपातकालीन स्थिति में पुलिस को वहां मौजूद रहना पड़ता है. अगर 7000 लोग प्रवेश करते हैं तो यह मानना मुश्किल है कि राज्य की विफलता नहीं है. अगर 7000 लोगों को आना ही था, तो वे पैदल नहीं आ सकते. यह राज्य मशीनरी की पूरी तरह विफलता है.
प्रशासन की 100 फीसदी नाकामी राज्य सरकार ने कहा कि हमने अब सब कुछ संभाल लिया है. हम आरोपियों की पहचान करने और गिरफ्तार करने की कोशिश कर रहे हैं. कोर्ट ने फटकारते हुए कहा कि घटना के बाद यह सब क्यों? राज्य ने इस पर पहले ध्यान क्यों नहीं दिया? कोर्ट ने नाराजगी से कहा कि अगर 7000 लोग इकट्ठा हुए तो यह प्रशासन की 100 फीसदी नाकामी है. अगर 15 लोग घुसे तो हम समझ सकते हैं कि सुरक्षा में चूक हुई है.इस पर सरकार ने सफाई दी कि हमने यह नहीं कहा कि 7000 लोग थे.
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा हलफनामा कोर्ट ने सरकार से कहा कि वो हलफनामा दाखिल करे. राज्य सरकार के वकील ने कहा कि हमें भी इस घटना पर दुख है. इस पर कोर्ट ने कहा कि हमने आपकी बात सुनी. इसे रिकॉर्ड पर दर्ज करें. हमें बर्बरता किए जाने को लेकर कई संदेश मिले हैं. ये घटना क्यों हुई? लोगों ने क्यों घुसकर तोड़फोड़ की? ये बातें समझ में नहीं आतीं. क्या यह कानून और व्यवस्था की विफलता है? आपको समझना चाहिए कि राज्य की आम जनता किस पीड़ा से गुजर रही है. ऐसा कुछ होना चाहिए जिससे जनता और कोर्ट के मन में विश्वास पैदा हो. कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि चलो हर मरीज को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कर देते हैं. अस्पताल बंद कर दो, सब सुरक्षित रहेंगे. अस्पताल बंद कर दो, यही सबसे अच्छा है?

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