
कोई भी सभ्य समाज और सरकारी संस्थान बुजुर्गों की यातना को नजरअंदाज नहीं कर सकता: कोर्ट
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18 जनवरी को दिए गए एक आदेश में जज ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा को पहले ही घोर उदासीनता, अनियमितताओं से अवगत कराया गया है कि कैसे इस मामले को दबाने का प्रयास किया गया था. इस मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाएं ताकि देश में एक मजबूत संदेश दिया जा सके.
दिल्ली की एक कोर्ट ने एक बुजुर्ग की अस्वाभाविक मौत के मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि वह उम्मीद करती है कि पुलिस पूरे देश में कड़ा संदेश देने के लिए उचित कदम उठाएगी. जज ने कहा कि कोई भी सभ्य समाज और कानून के शासन द्वारा शासित संस्थाएं परिवार के उत्पीड़न, उपेक्षा और एक बुजुर्ग की यातना को नजरअंदाज नहीं कर सकती हैं.
मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण की पीठासीन अधिकारी कामिनी लाउ BSF के 85 वर्षीय रिटायर्ड कर्मचारी उजागर सिंह की अस्वाभाविक मौत के मामले में सुनवाई कर रही थीं. इस मामले में पुलिस ने दावा किया कि जम्मू के रहने वाले उजागर सिंह की सड़क दुर्घटना में मौत हुई. वहीं अदालत ने पाया कि वह अपने ही बच्चों द्वारा पारिवारिक दुर्व्यवहार का शिकार था और अप्राकृतिक परिस्थितियों में उसकी मौत हुई.
18 जनवरी को दिए गए एक आदेश में जज ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा को पहले ही घोर उदासीनता, अनियमितताओं से अवगत कराया गया है कि कैसे इस मामले को दबाने का प्रयास किया गया था. इस मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाएं ताकि देश में एक मजबूत संदेश दिया जा सके.
अदालत ने अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (मध्य) की दलीलों पर ध्यान दिया कि जांच को पहाड़गंज पुलिस स्टेशन से ट्रांसफर कर दिया गया था और IPC की अतिरिक्त धाराएं, गैर इरादतन हत्या के अपराध समेत कई धाराएं इसमें जोड़ी गई थीं. इसमें माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 के प्रावधान भी लागू किए गए. इसके अलावा जम्मू के जिला मजिस्ट्रेट को एक पत्र भेजा गया.
अदालत ने यह भी कहा कि दोषी पुलिस अधिकारियों (पहाड़गंज पुलिस स्टेशन अधिकारी और सहायक पुलिस आयुक्त) और दक्षिण पश्चिम जिले के अधिकारियों के खिलाफ अदालत द्वारा चिह्नित सभी विभिन्न खामियों और अनियमितताओं के लिए उचित विभागीय कार्रवाई की जा रही थी.
अदालत ने कहा कि मैं देख सकती हूं कि कुछ कृत्य अपने आप में आपत्तिजनक और अस्वीकार्य हैं. बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार, पारिवारिक उत्पीड़न, उपेक्षा और बुजुर्ग को यातना देना, जिसे कोई भी सभ्य समाज और कानून के शासन द्वारा शासित संस्थाएं अनदेखा नहीं कर सकती हैं. कोर्ट ने इस मामले को 30 जनवरी को कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने तक सुनवाई टाल दी.

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