
कैसे दे सकते हैं नौकरी के बाद एक और नौकरी? वीरांगनाओं की मांग पर बोले सीएम गहलोत
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राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने पुलवामा के शहीदों की वीरांगनाओं की मांग पर रविवार को बयान दिया. उन्होंने कहा कि शहीदों के परिवारों को नेताओं ने इकट्ठा किया था. इस मामले में सचिन पायलट ने गहलोत पर इशारों में हमला भी बोला था. उन्होंने कहा था कि अगर कोई मिलने आए तो ईगो नहीं दिखाना चाहिए.
जयपुर में वीरांगनाओं का धरना भले ही खत्म करा दिया गया हो लेकिन सीएम अशोक गहलोत के एक बयान से ऐसा लग रहा है कि अभी यह मामला और तूल पकड़ेगा. दरअसल वह इस मुद्दे पर रविवार को बोले- मुझे लगता है कि इन सभी (शहीद परिवारों) को नेताओं ने इकट्ठा किया था. घटना 2019 में हुई थी. उस समय आपने (विपक्ष ने) कोई मांग नहीं की थी. आप (विपक्ष) 4 साल बाद अचानक धरना दे रहे हैं और राजस्थान को बदनाम कर रहे हैं. आप बच्चों की नौकरी के अलावा एक और नौकरी कैसे मांग सकते हैं?
इससे पहले सीएम ने कहा था कि वे किसी शहीद के बच्चे की नौकरी का हक नहीं मारेंगे, लेकिन किसी के रिश्तेदार को नौकरी देना ठीक परंपरा नहीं है. इस बीच सरकार का एक और बयान आया था कि शहीदों की वीरांगनाओं के लिए नियम के तहत जो कुछ भी देना था, दिया जा चुका है.
28 फरवरी से दे रही थीं धरना
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 2019 में हुए आतंकवादी हमले में राजस्थान के सीआरपीएफ जवान रोहिताश लांबा, हेमराज मीणा और जीतराम गुर्जर शहीद हो गए थे. इन जवानों की विधवाओं मंजू जाट, मधुबाला, सुंदरी देवी और रेणु सिंह ने गहलोत सरकार पर उनसे किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया है. वह वादों को पूरा करने की मांग को लेकर 28 फरवरी से प्रदर्शन कर रही थीं. वह नियमों में बदलाव की मांग करते हुए कुछ दिनों से सीएम गहलोत से मुलाकात का समय मांग रही थीं. हालांकि 12 दिन बाद पुलिस ने उनका धरना खत्म करा दिया था.
वीरांगनाओं की ये हैं मांगें
- वीरांगनाओं की मांग है कि न सिर्फ उनके बच्चों, बल्कि उनके रिश्तेदारों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी दी जाए.

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