
केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ लामबंदी में जुटे केजरीवाल, जानें अब तक किन पार्टियों का मिला साथ?
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दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ लामबंदी में जुटे हैं. वह गुरुवार को तमिलनाडु के सीएम स्टालिन से मिले, स्टालिन ने उन्हें समर्थन देने की बात कही है. जबकि वह शुक्रवार को झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन से मुलाकात करेंगे. इससे पहले उन्हें कई पार्टियों का समर्थन मिल चुका है. लेकिन AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने केजरीवाल को समर्थन देने से साफ इन्कार कर दिया है.
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश के ख़िलाफ समर्थन जुटाने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इन दिनों विपक्ष के तमाम नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं. उन्हें कई पार्टियों का समर्थन भी मिल रहा है. दरअसल, केजरीवाल की प्लानिंग है कि इस बिल को राज्यसभा में निरस्त करवा दिया जाए. इसी के लिए वह कड़ी मशक्कत कर रहे हैं. अभी तक JDU, RJD, TMC, शिवसेना (UBT), NCP, BRS और CPI (M) के बाद, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने अध्यादेश के खिलाफ अपना समर्थन दिया है.
दरअसल, अरविंद केजरीवाल तमिलनाडु के सीएम और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन से मिलने चेन्नई पहुंचे. CM स्टालिन ने आश्वासन दिया कि उनकी पार्टी राज्यसभा में अध्यादेश के खिलाफ मतदान करेगी. स्टालिन ने केंद्र पर गैर भाजपा शासित राज्यों में संकट पैदा करने का आरोप लगाया और कहा कि केंद्र सरकार विधिवत निर्वाचित सरकारों को स्वतंत्र रूप से काम करने से रोक रही है. स्टालिन ने आग्रह किया कि गैर-बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राजनीतिक दलों के नेताओं को भी अध्यादेश के विरोध में अपना समर्थन देना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए विपक्षी दलों के बीच इस तरह की स्वस्थ चर्चा जारी रहनी चाहिए.
उधर, केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली की जनता 8 साल तक न्याय के लिए लड़ती रही, लेकिन उसके पक्ष में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बीजेपी ने महज 8 दिनों में पलट दिया. उन्होंने केंद्र के अध्यादेश को अलोकतांत्रिक, असंवैधानिक और देश के संघीय ढांचे के खिलाफ बताया.
लोकतंत्र बचाने के लिए DMK का समर्थन चाहिए: भगवंत मान
इस मुलाकात के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि DMK सरकार को एक ऐसे राज्यपाल के खिलाफ लड़ाई लड़नी पड़ी, जिसने न केवल विधेयकों को पारित करने से परहेज किया, बल्कि राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण को भी नहीं पढ़ा. मान ने कहा कि मैं अपने राज्य में भी इसी तरह की समस्याओं का सामना कर रहा हूं. मुझे बजट सत्र बुलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करना पड़ा, क्योंकि राज्यपाल इसकी अनुमति नहीं दे रहे थे. हम लोकतंत्र को बचाने के लिए डीएमके का समर्थन चाहते हैं.
2 जून को हेमंत सोरेन से मिलेंगे केजरीवाल

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