
कितनी तैयारी करनी होती है परमाणु परीक्षण के लिए? जिसका ट्रंप PAK को लेकर कर गए इशारा
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ट्रंप ने पाकिस्तान पर गुप्त परमाणु परीक्षण का इशारा किया. परीक्षण के लिए 6-18 महीने लगते हैं. बम डिजाइन, यूरेनियम समृद्धि, चगई जैसी साइट पर गड्ढा खोदना, सिस्मोग्राफ लगाना. पाकिस्तान के पास 170 हथियार हैं, लेकिन CTBT निगरानी से छिपाना कठिन. खतरा प्रतिबंध का है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, रूस, चीन और उत्तर कोरिया गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण कर रहे हैं. ट्रंप ने इसे आधार बनाकर अमेरिका को 33 साल बाद परमाणु परीक्षण फिर शुरू करने का आदेश दिया. उन्होंने पाकिस्तान पर सीधा इशारा करते हुए कहा कि पाकिस्तान दुनिया से छिपाकर परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहा है. ये बातें हथियारों की होड़ को फिर तेज करने का संकेत दे रही हैं. लेकिन सवाल ये है – परमाणु परीक्षण के लिए कितनी तैयारी लगती है?
परमाणु परीक्षण का मतलब है एक परमाणु बम को विस्फोट करके उसकी ताकत, डिजाइन और असर को जांचना. ये परीक्षण ज्यादातर जमीन के नीचे (अंडरग्राउंड) होते हैं, ताकि धमाका छिपा रहे और पर्यावरण को कम नुकसान हो. पाकिस्तान ने आखिरी बार 1998 में चगई पहाड़ियों में 6 परमाणु परीक्षण किए थे. तब से वो गुप्त परीक्षणों के शक में रहा है. ट्रंप का इशारा उसी की ओर है – क्या पाकिस्तान फिर से ऐसा कुछ कर रहा है?
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परमाणु परीक्षण कोई आसान काम नहीं. ये वैज्ञानिक, तकनीकी, लॉजिस्टिकल और राजनीतिक तैयारी का मिश्रण है. एक छोटे देश के लिए भी इसमें महीनों से सालों लग सकते हैं.
डिजाइन बनाना: वैज्ञानिकों को बम का नया मॉडल डिजाइन करना पड़ता है. इसमें कंप्यूटर सिमुलेशन से विस्फोट की गति, ऊर्जा और रेडियोएक्टिविटी चेक की जाती है. पाकिस्तान के पास खान रिसर्च लैबोरेट्रीज (KRL) और नेशनल डिफेंस कॉम्प्लेक्स (NDC) जैसी जगहें हैं, जहां 500-1,000 वैज्ञानिक काम करते हैं.

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