
काजियों की ताकत घटाने पर रुक जाएंगी नाबालिगों की शादियां! क्यों असम में लागू हुआ नया मुस्लिम मैरिज लॉ
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असम में गुरुवार को मुस्लिम शादियों पर 9 दशक पुराना कानून हट गया. इसकी जगह आए नए लॉ के साथ ही कई नियमों में बदलाव होगा. खासकर इससे चाइल्ड मैरिज पर रोक लग जाएगी. साथ ही शादी-ब्याह में काजियों का रोल भी खत्म हो जाएगा. ज्यादा जोर इसी बात पर दिया जा रहा है.
असम बीते कुछ समय से लगातार चर्चा में है. इस बार चर्चा की वजह है मुस्लिम शादियों से जुड़ा नया कानून. गुरुवार को राज्य सरकार ने मुस्लिम शादियां और तलाक रजिस्टर करने वाले पुराने कानून को हटाकर नया लॉ लागू कर दिया, जिसपर काफी विवाद हो रहा है. विपक्ष का कहना है कि ये मुस्लिमों के लिए भेदभावपूर्ण है. वहीं मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि हमारा मकसद बहुविवाह पर रोक लगाना है.
असम मुस्लिम मैरिज एंड डिवोर्स रजिस्ट्रेशन एक्ट 1935 की जगह अब असम कंपल्सरी रजिस्ट्रेशन ऑफ मुस्लिम मैरिज एंड डिवोर्स बिल 2024 ने ले ली है. बिल में तीन अहम शर्तें हैं- बाल विवाह का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकेगा, जिस्ट्रेशन काजियों की बजाए सरकार करेगी, और दोनों पक्षों की रजामंदी के बगैर शादी नहीं हो सकेगी. सुनने में काफी प्रोग्रेसिव लगते इस कानून को लेकर विपक्ष सरकार को घेर रहा है.
समझिए, क्यों इस बिल को लाने की जरूरत हुई और क्यों हो रहा इसका विरोध.
पुराने कानून में कौन सी बातें शादी और तलाक के लिए बने इस कानून के तहत ये प्रोसेस रजिस्टर की जाती थी. बाद में एक्ट में हल्के-फुल्के बदलाव हुए. जैसे साल 2010 में एक्ट में स्वैच्छिक की जगह अनिवार्य शब्द जोड़ा गया, जिससे शादी और डिवोर्स का रजिस्ट्रेशन जरूरी हो गया. लेकिन इसमें कई कमियां थीं, जैसे ये सब काजियों के पास होता. ऐसे में वे नाबालिगों की शादी को मान्यता दे देते थे. साथ ही इसकी वजह से टीन-एज प्रेग्नेंसी भी बढ़ रही थी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में लगभग 95 काजी थे, जो यही काम करते.
नए कानून में क्या बदला पुराने कानून को हटाते हुए सरकार ने तर्क दिया कि 1935 एक्ट की वजह से माइनर्स की शादियों को भी मान्यता मिल रही थी. बता दें कि पुराने लॉ का सेक्शन 8 इसकी इजाजत देता था. अब उम्मीद की जा रही है कि बाल विवाह काफी हद तक कम हो सकेगा.

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