
कांग्रेस में हार का ठीकरा कृष्णा अल्लावरु पर, क्या राहुल गांधी को मिलेगी क्लीन चिट?
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बिहार में कांग्रेस की हुई दुर्गति की समीक्षा के पहले ही ऐसा माहौल बनने लगा है, जिसे देखकर साफ कहा जा सकता है कि किसे जिम्मेदार ठहराया जाने वाला है और किसे क्लिनचिट मिलने वाली है.
बिहार विधानसभा चुनावों का परिणाम कांग्रेस के लिए बहुत खराब रहा है. एनडीए ने 243 में से 202 सीटें जीतकर चुनाव में एकतरफा जीत दर्ज की. कांग्रेस जो महागठबंधन का एक प्रमुख घटक थी और 61 सीटों पर लड़कर केवल 6 सीटें ही जीत पाई. कांग्रेस के लिए यह बुरा नहीं, शर्मनाक नतीजा था. क्योंकि इसी कांग्रेस ने 2020 में 70 में से 19 सीटें जीतने में सफलता हासिल की थी. जाहिर है कि अबकी बार हुई बुरी हार की जिम्मेदार तय करने के लिए रिपोर्ट मांगी जाएगी. इंडियन एक्सप्रेस अखबार में छपी खबर की मानें तो पार्टी हाईकमान ने कई वरिष्ठ नेताओं और पर्यवेक्षकों को हार के लिए जिम्मेदारी तय करने के लिए लगा दिया है.
इस खबर के अनुसार कांग्रेस के 10 हार चुके उम्मीदवारों का कहना है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू की गैर-राजनीतिक कार्यशैली, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा की नाकामी, बाहरी लोगों को टिकट देना और पार्टी का कमज़ोर संगठन ये वे प्रमुख कारण हैं. जिन्हें कांग्रेस नेताओं और हार चुके उम्मीदवारों ने बिहार विधानसभा चुनावों में अपनी करारी हार के लिए जिम्मेदार माना है.
लेकिन क्या आपको लगता है कि जब रिपोर्ट सामने आएगी तो उसमें राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा की नाकामी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा? अब तक कांग्रेस पार्टी की हार की समीक्षाओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि रिपोर्ट जब भी सामने आएगी तो उसमें यही कहा जाएगा कि राहुल गांधी के वोट अधिकार यात्रा की बातों को जनता तक ठीक ढंग से पहुंचाया नहीं जा सका. मतलब साफ है कि किसे जिम्मेदार ठहराना है किसे क्लीनचिट देना है यह तय हो चुका है.
राहुल गांधी को क्लीन चिट: पुरानी परंपरा या नई रणनीति?
कांग्रेस में हार की जिम्मेदारी स्थानीय या प्रभारियों पर डालने की यह प्रवृत्ति नई नहीं है. 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भी राहुल गांधी पर सीधा आरोप नहीं लगाया गया, बल्कि संगठनात्मक कमजोरियों को बहाना बनाया गया. हरियाणा और महाराष्ट्र की हालिया हारों में भी राज्य इकाइयों पर ठीकरा फोड़ा गया, जबकि केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति पर सवाल कम ही उठे.
बिहार के संदर्भ में, अल्लावरु को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है, लेकिन हार के बाद उन्हें बलि का बकरा बनाने की तैयारी चल रही है. X पर वायरल पोस्ट में कहा गया, बिहार की हार का ठीकरा इन दोनों पर फूटेगा . आरजेडी में संजय यादव और बीजेपी में कृष्णा अल्लावरु. टिकट वितरण और निर्णय इन्हीं ने लिए थे. जाहिर है कि राहुल गांधी की 'वोट अधिकार यात्रा' और कैंपेनिंग को बचाने की कोशिश साफ दिखने लगी है.

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