
कहीं लिस्ट में मृतकों के नाम, कहीं सरकारी स्कीम से नाम हटने का डर... SIR के बीच बिहार के अररिया से Ground Report
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बिहार के सीमांचल क्षेत्र के अररिया जिले में वोटर लिस्ट रिविजन प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है. कई जीवित लोगों के नाम गायब हैं, जबकि मृतकों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल कर दिए गए हैं. दस्तावेज देने और BLO से संपर्क करने के बावजूद समस्याएं बनी हुई हैं. ग्रामीण सरकारी लाभ और वोटिंग अधिकार को लेकर चिंतित हैं.
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट रिविजन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में बयानबाज़ी तेज है. इन दावों और आरोपों के बीच आज तक की टीम सीमांचल के अररिया जिले के बैजनाथपुर पहुंची, जहां यह समस्या सबसे गंभीर है.
गांव पहुंचते ही मिले राजमिस्त्री गंगा पासवान, जो इन दिनों काम छोड़कर केवल अपने नाम की तलाश और BLO से संपर्क में लगे हैं. गंगा बार-बार फोन कर रहे हैं, लेकिन या तो कॉल होल्ड पर लगती है या जवाब में उन्हें स्कूल में कागज देने की सलाह मिलती है.
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मंजू देवी, जो पढ़ी-लिखी नहीं हैं, अपना वोटर कार्ड लेकर आईं लेकिन यह भी पता नहीं लगा पा रहीं कि उनका नाम लिस्ट में है या नहीं. समाजसेवी रंजीत बताते हैं कि "फ़ॉर्म घर-घर नहीं पहुंचे, मृतकों के नाम शामिल हैं और कई जीवित ग्रामीणों के नाम गायब हैं."
गरीबों की चिंता: सरकारी लाभ और वोट का अधिकार
मंजू देवी कहती हैं, "अगर नाम नहीं जुड़ा तो सरकारी लाभ नहीं मिलेगा. हम गरीब आदमी हैं, वोटर लिस्ट में नाम जरूरी है." फिकनी देवी कहती हैं कि कागज होने के बावजूद वोटर कार्ड नहीं बन रहा, जिससे उनका डर और बढ़ गया है. इसी तरह नरेंद्र यादव भी चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया से नाराज हैं, और बताते हैं कि उनकी बेटी का नाम भी वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है.

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