
कमांडो का पहरा, CCTV से निगरानी... जानिए कैसी है डिब्रूगढ़ जेल की सुरक्षा, जहां शिफ्ट किया गया अमृतपाल
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खालिस्तानी सर्मथक अमृतपाल सिंह को गिरफ्तार कर पंजाब पुलिस असम के डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में ले गई है जहां उसके नौ सहयोगी बंद हैं. यह एक हाई-सिक्योरिटी जेल है और यहां कट्टरपंथियों और अन्य कुख्यात अपराधियों को रखा गया है.
पंजाब में मोगा पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने के बाद गिरफ्तार किए गए खालिस्तानी अलगाववादी अमृतपाल सिंह को असम की डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में रखा जा रहा है. अमृतपाल के करीबी सहयोगी पप्पलप्रीत सिंह,जिसे 10 अप्रैल को पंजाब के होशियारपुर से गिरफ्तार किया गया था, वो और उसके अन्य आठ सहयोगी पहले से ही इस जेल में बंद है. यह जेल पंजाब से सैकड़ों किलोमीटर दूर है. अमृतपाल को यहां सीसीटीवी की निगरानी में रखा जाएगा.
दरअसल अमृतपाल और उसके सहयोगियों को पंजाब या दिल्ली की जेलों में रखने के बजाय असम में इसलिए रखा जा रहा है क्योंकि यहां अलगाववादी समूह वाले गैंगस्टर भी सक्रिय हैं. आने वाले दिनों में इस जेल में ही अमृतपाल से सेंट्रल एजेंसी की कई टीमें पूछताछ कर सकती हैं. डिब्रूगढ़ जेल में अमृतपाल के चाचा, एक फाइनेंसर, एक मीडिया सलाहकार और सुरक्षा गार्ड सहित कुल नौ सहयोगी हैं. पप्पलप्रीत सिंह, दलजीत सिंह कलसी, भगवंत सिंह उर्फ बाजेके, गुरमीत सिंह बुक्कनवाल, बसंत सिंह दौलतपुरा, हरजीत सिंह, वरिंदर सिंह उर्फ फौजी, वरिंदर सिंह और गुरिंदर पाल सिंह असम की सेंट्रल जेल में बंद हैं.
- अमृतपाल को सीसीटीवी की निगरानी में रखा जाएगा. जेल के बाहर असम पुलिस के कमांडो तैनात हैं जबकि जेल के अंदर की सुरक्षा जेल प्रशासन की होती है.
- 1859-60 में बनी डिब्रूगढ़ जेल को अधिकारी राज्य की सबसे सुरक्षित जेल मानते हैं. यह पूर्वोत्तर की सबसे पुरानी जेल है और इसका इस्तेमाल यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असोम-इंडिपेंडेंट (उल्फा-I) के कई शीर्ष नेताओं को रखने के लिए किया जाता था.
- अधिकारियों ने कहा कि डिब्रूगढ़ जेल में अब खालिस्तानी कट्टरपंथियों को रखा गया है, परिसर और उसके आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था शुरू की गई है. जिस सेल में अमृतपाल के सहयोगियों को रखा गया है, वहां कई लेयर की सिक्योरिटी है.
- सीआरपीएफ के जवान चौबीसों घंटे जेल की रखवाली कर रहे हैं. असम पुलिस के कमांडो भी सुरक्षा में तैनात हैं.

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